Indian Gem Jewellery Industry ने अमेरिका के साथ हुए अंतरिम व्यापार समझौते (India-US Interim Trade Deal) के तहत हीरे और रंगीन रत्नों को शून्य शुल्क (Zero Duty on Diamonds & Gemstones) के साथ अमेरिकी बाजार में प्रवेश की घोषणा का स्वागत किया है। उद्योग जगत ने इसे भारतीय डायमंड एक्सपोर्ट सेक्टर के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट बताया है।
60% गिरा था डायमंड निर्यात
जीजेईपीसी (GJEPC) के चेयरमैन किरीट भंसाली ने कहा कि यह निर्णय ऐसे समय आया है जब अमेरिकी टैरिफ के कारण भारत के कट और पॉलिश्ड हीरों का निर्यात (Cut & Polished Diamond Export) 60 प्रतिशत से अधिक गिर गया था। निर्यात 3.64 अरब डॉलर से घटकर 1.45 अरब डॉलर रह गया था, जिससे भारतीय जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर पर गंभीर असर पड़ा।
उन्होंने कहा कि Zero Tariff Policy से भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और अमेरिका जैसे बड़े बाजार में फिर से मजबूत वापसी संभव होगी।
किन उत्पादों पर मिला लाभ?
भारत और अमेरिका के बीच बने इस ढांचे के तहत कई उत्पादों पर आयात शुल्क कम या समाप्त किए जाएंगे। इनमें शामिल हैं:
- हीरे और रंगीन रत्न (Diamonds & Colored Gemstones)
- जेनेरिक दवाइयां
- विमान के पुर्जे
इससे Make in India Initiative और भारत की वैश्विक निर्यात क्षमता को मजबूती मिलेगी।
ज्वेलरी पर 18% ड्यूटी जारी
हालांकि, तैयार आभूषणों (Finished Jewellery) पर अभी भी 18 प्रतिशत शुल्क लागू रहेगा। GJEPC को उम्मीद है कि अंतिम समझौते के बाद Lab-Grown Diamonds और Synthetic Gemstones को भी टैरिफ छूट सूची में शामिल किया जाएगा।
GJC: SMEs को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा
GJC चेयरमैन राजेश रोकड़े ने कहा कि रत्नों और हीरों पर जीरो ड्यूटी से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में अभूतपूर्व पहुंच मिलेगी। इससे वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, मुनाफा सुधरेगा और भारतीय कारीगरों की कृतियां उचित कीमत पर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सकेंगी।
GJC उपाध्यक्ष अविनाश गुप्ता ने कहा कि यह फैसला खासकर Small and Medium Enterprises (SMEs) और पारिवारिक व्यवसायों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।
- निर्यात में बढ़ोतरी
- राजस्व में सुधार
- रोजगार सृजन
- लॉजिस्टिक्स, डिजाइन और रिटेल सेक्टर को बढ़ावा
उन्होंने इसे आर्थिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से बड़ी जीत बताया।
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- भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते में क्या बड़ी घोषणा की गई है?
इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय हीरे और रंगीन रत्नों को शून्य शुल्क (Zero Duty) के साथ अपने बाजार में प्रवेश देने की घोषणा की है। इससे भारतीय निर्यातकों को टैरिफ बोझ से राहत मिलेगी और अमेरिका जैसे बड़े बाजार में प्रतिस्पर्धा करना आसान होगा। - अमेरिकी टैरिफ का भारतीय डायमंड निर्यात पर क्या असर पड़ा था?
उच्च आयात शुल्क के कारण भारत के कट और पॉलिश्ड हीरों का निर्यात 60% से अधिक गिर गया था। निर्यात 3.64 अरब डॉलर से घटकर 1.45 अरब डॉलर रह गया, जिससे उद्योग को भारी नुकसान हुआ और कई इकाइयों पर दबाव बढ़ा। - इस समझौते के तहत किन-किन उत्पादों को राहत मिली है?
हीरे और रंगीन रत्नों के अलावा जेनेरिक दवाइयों और विमान के पुर्जों पर भी आयात शुल्क कम या समाप्त किए जाएंगे। इससे ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती मिलेगी और भारत की वैश्विक निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। - क्या तैयार आभूषणों (Finished Jewellery) पर भी शून्य शुल्क लागू हुआ है?
नहीं, फिलहाल तैयार ज्वेलरी पर 18% आयात शुल्क जारी रहेगा। हालांकि उद्योग संगठनों को उम्मीद है कि अंतिम समझौते में लैब-ग्रोउन डायमंड और सिंथेटिक रत्नों को भी टैरिफ छूट सूची में शामिल किया जा सकता है। - इस फैसले से भारतीय उद्योग और रोजगार पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
जीरो ड्यूटी से निर्यात में बढ़ोतरी, राजस्व में सुधार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती आएगी। खासकर छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) तथा पारिवारिक व्यवसायों को बड़ा लाभ मिलेगा। इससे लॉजिस्टिक्स, डिजाइन और रिटेल जैसे जुड़े क्षेत्रों में भी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
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