HSBC and Macquarie Silver Target: कमोडिटी मार्केट में मची हलचल के बीच निवेशकों और आम खरीदारों के मन में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही घूम रहा है कि क्या चांदी में और गिरावट आएगी? पिछले कुछ समय में चांदी की कीमतों में काफी एक्शन देखने को मिला है, लेकिन अब ग्लोबल एक्सपर्ट्स और दिग्गज ब्रोकरेज फर्म्स के सुर बदलने लगे हैं। HSBC और Macquarie जैसी बड़ी संस्थाओं के विश्लेषकों ने चांदी के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है और निवेशकों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि चांदी फिलहाल अपनी वास्तविक कीमत से काफी ऊपर ट्रेड कर रही है और आगे इसमें उतार-चढ़ाव के साथ गिरावट का जोखिम बढ़ सकता है।
सोने, चांदी के MCX, इंटरनेशनल मार्केट, सराफा और अपने शहर का लेटेस्ट भाव हमारी नई वेबसाइट पर देखें- https://goldpricetodaynews.com/
HSBC ने चांदी को बताया Overvalued
एचएसबीसी (HSBC) के विश्लेषकों के अनुसार, चांदी इस समय “Fundamentally Overvalued” यानी अपनी असली वैल्यू से ज्यादा महंगी हो चुकी है। विश्लेषकों ने कहा है कि अब चांदी की चाल पूरी तरह सोने के साथ नहीं चल सकती।
उनका मानना है कि सोने में अगर आगे तेजी भी बनी रहती है, तब भी जरूरी नहीं कि चांदी उसी रफ्तार से ऊपर जाए। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में “Gold-Silver Ratio” बढ़ सकता है, जिसका मतलब है कि सोने के मुकाबले चांदी कमजोर प्रदर्शन कर सकती है।
एक्सपर्ट के अनुसार, चांदी में ऊपर जाने की गुंजाइश अब सीमित दिखाई दे रही है क्योंकि इसकी कीमतें पहले ही काफी बढ़ चुकी हैं।
Macquarie ने भी जताई गिरावट की आशंका
मैक्वेरी (Macquarie) के विश्लेषकों ने भी चांदी के बाजार को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। फर्म के अनुसार, मौजूदा स्तरों से चांदी में बड़ी तेजी की संभावना कम दिखाई दे रही है, जबकि गिरावट का जोखिम बढ़ सकता है। उन्होंने 21 मई की अपनी रिपोर्ट में कुछ मुख्य बातें कहीं हैं।
उनका कहना है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक (US Federal Reserve) 2027 की पहली छमाही में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। आमतौर पर ऊंची ब्याज दरें सोना-चांदी जैसी कीमती धातुओं पर दबाव बनाती हैं क्योंकि निवेशक ज्यादा रिटर्न वाले विकल्पों की तरफ बढ़ते हैं।
मिडिल ईस्ट तनाव से बढ़ सकती है Volatility
Macquarie के विश्लेषकों का कहना है कि मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार में भारी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। जब तक यह तनाव कम नहीं होता, तब तक चांदी की कीमतों में तेज उछाल और गिरावट दोनों देखने को मिल सकती हैं।
हालांकि फर्म का अनुमान है कि इस साल के बाकी महीनों में चांदी की औसत कीमत मौजूदा स्तरों के आसपास रह सकती है, लेकिन वैश्विक आर्थिक हालात खराब होने पर इसमें बड़ी गिरावट भी आ सकती है।
औद्योगिक मांग में दिख रही कमजोरी
विश्लेषकों के मुताबिक, चांदी की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ने के कारण कई उद्योगों ने इसकी खरीदारी कम कर दी है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और अन्य इंडस्ट्रियल सेक्टर में लागत बढ़ने से मांग पर दबाव देखा जा रहा है।
इसके अलावा, सोने के मुकाबले चांदी को केंद्रीय बैंकों का उतना मजबूत समर्थन नहीं मिलता। यही कारण है कि बाजार में तनाव बढ़ने पर चांदी को ज्यादा जोखिम वाली धातु माना जाता है।
क्या आगे और गिर सकती है चांदी?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल चांदी की कीमतों में तेजी की संभावनाएं सीमित दिखाई दे रही हैं। अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था कमजोर होती है, ब्याज दरें बढ़ती हैं या निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता घटती है, तो चांदी में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
हालांकि, बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है और भू-राजनीतिक घटनाएं कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में निवेशकों को सावधानी के साथ बाजार पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है।
चांदी का बाजार इस समय एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है। HSBC और Macquarie जैसी बड़ी संस्थाओं के एक्सपर्ट्स यह संकेत दे रही हैं कि चांदी फिलहाल अपनी वास्तविक वैल्यू से ऊपर ट्रेड कर रही है। ब्याज दरों का दबाव, कमजोर मांग और वैश्विक आर्थिक जोखिम आने वाले समय में चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ा सकते हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए सतर्क रहना और बाजार की दिशा को समझना बेहद जरूरी होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल, FAQ’s
1. क्या चांदी की कीमतों में और गिरावट आने की संभावना है?
विश्लेषकों के अनुसार चांदी में आगे गिरावट की संभावना पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता। यदि वैश्विक आर्थिक स्थिति कमजोर होती है, ब्याज दरें बढ़ती हैं या निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता घटती है, तो चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है और इसमें और गिरावट देखने को मिल सकती है।
2. HSBC ने चांदी को Overvalued क्यों बताया है?
HSBC का मानना है कि चांदी वर्तमान में अपनी वास्तविक फंडामेंटल वैल्यू से काफी ऊपर ट्रेड कर रही है। इसका मतलब है कि कीमतें वास्तविक मांग और सप्लाई की तुलना में ज्यादा बढ़ चुकी हैं, जिससे आगे इसमें तेजी की संभावना सीमित हो गई है और करेक्शन का जोखिम बढ़ गया है।
3. Gold-Silver Ratio बढ़ने का निवेशकों के लिए क्या मतलब है?
Gold-Silver Ratio बढ़ने का मतलब है कि सोने के मुकाबले चांदी कमजोर प्रदर्शन कर सकती है। यानी अगर सोने की कीमतें स्थिर या बढ़ती भी हैं, तब भी चांदी उतनी तेजी से नहीं बढ़ेगी और कई मामलों में निवेशकों को चांदी में कम रिटर्न या दबाव देखने को मिल सकता है।
4. Macquarie की रिपोर्ट में चांदी को लेकर क्या मुख्य चिंता जताई गई है?
Macquarie ने संकेत दिया है कि भविष्य में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना चांदी जैसी कीमती धातुओं पर दबाव डाल सकती है। इसके अलावा, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण बाजार में तेज उतार-चढ़ाव और गिरावट का जोखिम बना रह सकता है।
5. चांदी की औद्योगिक मांग पर क्या असर पड़ रहा है?
चांदी की कीमतें पहले ही काफी बढ़ चुकी हैं, जिसके कारण इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर एनर्जी और अन्य औद्योगिक सेक्टर में इसकी मांग धीमी हो रही है। ऊंची कीमतों की वजह से कंपनियां खरीद कम कर रही हैं, जिससे कुल मांग पर दबाव बढ़ रहा है और यह कीमतों में कमजोरी का एक प्रमुख कारण बन सकता है।
1.यूट्यूब चैनल – Gold Price Today News (189K सब्सक्राइबर्स)
2.फेसबुक पेज – Gold Silver Price Today (118K फॉलोअर्स)
3. इंस्टाग्राम – Gold Price Today News (50K फॉलोअर्स)
4.X (ट्विटर) – @today_gold
5.टेलीग्रामग्रुप – Gold Silver Price
डिस्क्लेमर: ये न्यूज सिर्फ जानकारी के लिए बनाई गई है, निवेश या ट्रेडिंग की सलाह नहीं है। स्टोरी में दी गई राय एक्सपर्ट और ब्रोकरेज हाउस की है। गोल्ड प्राइस टुडे से जुड़े लोग निजी तौर पर सोने, चांदी की ट्रेडिंग नहीं करते हैं। हमारी सोने, चांदी में कोई पोजीशन नहीं है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें। सोने चांदी में निवेश जोखिम का काम है अपने विवेक का इस्तेमाल करें। आपको होने वाले किसी भी नुकसान की हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है।



