Friday, June 5, 2026
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Gold Price Target: डौग मोग्लिया की रिपोर्ट में सोने की कीमतों को लेकर बड़ा दावा, क्या 10000 डॉलर तक जा सकता है सोना?

Gold Price Target: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, केंद्रीय बैंकों की रिकॉर्ड खरीदारी और निवेशकों के बढ़ते भरोसे के बीच सोना एक बार फिर दुनिया का सबसे मजबूत सुरक्षित निवेश (Safe Haven Asset) बनकर उभरा है। कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में सोने की कीमतें नई ऐतिहासिक ऊंचाइयों तक पहुंच सकती हैं। इसी बीच रॉकफेलर ग्लोबल इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट के मैक्रो और मार्केट स्ट्रेटजिस्ट डौग मोग्लिया (Doug Moglia) की रिपोर्ट ने बाजार में नई चर्चा छेड़ दी है कि क्या सोना 10,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है?

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रिपोर्ट के अनुसार, कमोडिटी मार्केट में शुरू हुआ नया सुपर साइकिल (Commodity Super Cycle) अभी शुरुआती चरण में है और सोना इस पूरे चक्र का सबसे मजबूत आधार बना हुआ है। हाल के उतार-चढ़ाव के बावजूद सोने का दीर्घकालिक तेजी का दौर (Secular Bull Market) पूरी तरह कायम है।

कमोडिटी मार्केट में क्यों लौट रही है तेजी?

पिछले कई वर्षों तक निवेशकों ने कमोडिटी सेक्टर जैसे तेल, धातुएं और ऊर्जा को नजरअंदाज किया था, लेकिन अब वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई, ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई संकट के कारण कमोडिटी फिर से निवेशकों के पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा बन रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इलेक्ट्रिफिकेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर, रीशोरिंग और ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन जैसी वैश्विक थीम्स के कारण धातुओं की मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि सप्लाई सीमित बनी हुई है। इसी वजह से कीमती धातुओं में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली है।

सोने में तेजी के पीछे क्या हैं बड़े कारण?

डौग मोग्लिया के अनुसार, मौजूदा गोल्ड रैली पिछले 50 वर्षों के दो बड़े ऐतिहासिक बुल मार्केट्स जैसी दिखाई दे रही है। पहला 1970 के दशक में ब्रेटन वुड्स सिस्टम खत्म होने के बाद और दूसरा 2000 के दशक में टेक बबल फूटने के बाद देखने को मिला था।

वर्तमान तेजी का दौर 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद शुरू हुआ। पश्चिमी देशों द्वारा रूस के विदेशी मुद्रा भंडार पर लगाए गए प्रतिबंधों ने दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि डॉलर आधारित रिजर्व पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। इसके बाद कई देशों ने अपने रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ाई।

केंद्रीय बैंकों ने रिकॉर्ड मात्रा में खरीदा सोना

2022 से 2024 के बीच दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने हर साल 1,000 टन से ज्यादा सोना खरीदा। यह दुनिया की कुल वार्षिक गोल्ड माइनिंग का लगभग 20-25% हिस्सा है। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंक सोने को सबसे सुरक्षित संपत्ति मान रहे हैं क्योंकि इसमें किसी तीसरे पक्ष या डिफॉल्ट का जोखिम नहीं होता।

अब केवल डॉलर या ब्याज दरें नहीं तय कर रहीं गोल्ड की चाल

रिपोर्ट में कहा गया है कि अब सोने की कीमतें केवल डॉलर इंडेक्स, ब्याज दरों या आर्थिक विकास दर जैसे पारंपरिक कारकों पर निर्भर नहीं रह गई हैं। भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक वित्तीय अस्थिरता और केंद्रीय बैंकों की रणनीति अब गोल्ड मार्केट को ज्यादा प्रभावित कर रही है।

2025-26 में बाजार में आया बड़ा बदलाव

साल 2025 में गोल्ड रैली में नया मोड़ देखने को मिला। केंद्रीय बैंकों की खरीदारी कुछ कम हुई, लेकिन ETF और रिटेल निवेशकों की एंट्री तेजी से बढ़ी। वैश्विक गोल्ड ETF होल्डिंग्स करीब 20% बढ़कर 3,000 टन से ज्यादा पहुंच गईं।

हालांकि रिपोर्ट में चेतावनी भी दी गई है कि रिटेल और मोमेंटम निवेशकों की बढ़ती भागीदारी के कारण बाजार में अचानक बड़ी गिरावट (Sharp Correction) का जोखिम भी बढ़ सकता है। जनवरी 2026 में कीमती धातुओं में आई तेज गिरावट की एक बड़ी वजह अत्यधिक लीवरेज और सट्टेबाजी को माना गया।

क्या सच में सोना 10,000 डॉलर तक पहुंच सकता है?

डौग मोग्लिया का मानना है कि मौजूदा गोल्ड बुल मार्केट अभी शुरुआती चरण में है। इतिहास बताता है कि ऐसे सेक्युलर बुल मार्केट लगभग 10 साल तक चल सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यदि केंद्रीय बैंक आने वाले वर्षों में भी डॉलर की बजाय सोने को प्राथमिकता देते रहे, तो सोने में लंबी तेजी जारी रह सकती है।

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि:
• 2027 तक सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस से ऊपर जा सकता है।
• 2030 से पहले सोने की कीमत 8,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है।
• मजबूत वैश्विक मांग और लगातार केंद्रीय बैंक खरीदारी जारी रहने पर सोना 10,000 डॉलर प्रति औंस तक भी जा सकता है।

हालांकि यह एक दीर्घकालिक अनुमान है और बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

चांदी में भी दिख रही है मजबूत तेजी

रिपोर्ट में चांदी को “Higher Beta Gold” बताया गया है, यानी ऐसा मेटल जो सोने की तुलना में ज्यादा तेजी और ज्यादा गिरावट दोनों दिखा सकता है। ग्रीन एनर्जी, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन और AI सेक्टर में बढ़ती मांग के कारण 2021 से चांदी के बाजार में लगातार सप्लाई की कमी बनी हुई है।

चांदी की सप्लाई बढ़ाना आसान नहीं है क्योंकि दुनिया की लगभग 70% चांदी अन्य धातुओं जैसे जिंक, तांबा और लीड की माइनिंग के दौरान उप-उत्पाद (Byproduct) के रूप में निकलती है।

गोल्ड-टू-सिल्वर रेशियो क्या संकेत दे रहा है?

मई 2025 में गोल्ड-टू-सिल्वर रेशियो 100 तक पहुंच गया था, जिसका मतलब था कि चांदी सोने के मुकाबले काफी सस्ती थी। हालांकि हालिया तेजी के बाद यह अनुपात फिर से अपने ऐतिहासिक औसत 50-60 के करीब लौट आया है। ऐसे में अब चांदी में वैल्यू खरीदारी का आकर्षण पहले जितना मजबूत नहीं माना जा रहा।

वैश्विक आर्थिक बदलाव, केंद्रीय बैंकों की रिकॉर्ड खरीदारी और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी ने सोने को एक बार फिर लंबी अवधि का मजबूत निवेश बना दिया है। हालांकि 10,000 डॉलर प्रति औंस का लक्ष्य फिलहाल बहुत बड़ा और लंबी अवधि का अनुमान माना जा रहा है, लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां यह जरूर दिखाती हैं कि गोल्ड का बुल मार्केट अभी खत्म नहीं हुआ है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल, FAQ’s

1. क्या सच में सोना 10,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है?
रिपोर्ट के अनुसार, यदि केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीदते रहे और वैश्विक मांग मजबूत बनी रही, तो लंबी अवधि में सोना 10,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है।

2. सोने में तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण क्या है?
केंद्रीय बैंकों की रिकॉर्ड खरीदारी, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों का Safe Haven Asset की ओर झुकाव सोने में तेजी के मुख्य कारण हैं।

3. केंद्रीय बैंक इतनी बड़ी मात्रा में सोना क्यों खरीद रहे हैं?
कई केंद्रीय बैंक डॉलर आधारित रिजर्व पर निर्भरता कम करने और सुरक्षित संपत्ति रखने के लिए सोने की खरीदारी बढ़ा रहे हैं।

4. क्या चांदी में भी तेजी की संभावना है?
हां, ग्रीन एनर्जी, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन और AI सेक्टर की बढ़ती मांग के कारण चांदी में भी मजबूत तेजी देखने को मिल रही है।

5. गोल्ड ETF निवेश का बाजार पर क्या असर पड़ा है?
2025-26 में ETF और रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी से गोल्ड ETF होल्डिंग्स तेजी से बढ़ीं, जिससे सोने की कीमतों को मजबूत समर्थन मिला।

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डिस्क्लेमर: ये न्यूज सिर्फ जानकारी के लिए बनाई गई है, निवेश या ट्रेडिंग की सलाह नहीं है। स्टोरी में दी गई राय एक्सपर्ट और ब्रोकरेज हाउस की है। गोल्ड प्राइस टुडे से जुड़े लोग निजी तौर पर सोने, चांदी की ट्रेडिंग नहीं करते हैं। हमारी सोने, चांदी में कोई पोजीशन नहीं है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें। सोने चांदी में निवेश जोखिम का काम है अपने विवेक का इस्तेमाल करें। आपको होने वाले किसी भी नुकसान की हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है।

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