OMFIF Report: वैश्विक वित्तीय जगत से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जो आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार की दिशा बदल सकती है। OMFIF ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है, जो ग्लोबल इकोनॉमी में एक नए युग की शुरुआत का संकेत देती है। OMFIF Global Public Investor 2026 रिपोर्ट में सोने को लेकर काफी महत्वपूर्ण बातें कही गई हैं। इस रिपोर्ट का सबसे बड़ा निष्कर्ष यह है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अब सोने को केवल एक निवेश नहीं, बल्कि वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में रणनीतिक संपत्ति (Strategic Asset) और सुरक्षा कवच (Safe Haven) के रूप में देख रहे हैं। 2026 के इस सबसे नए वित्तीय सर्वे के अनुसार, डॉलर के मुकाबले सोने की स्वीकार्यता ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच रही है, जिससे डॉलर की बादशाहत को सीधी चुनौती मिल रही है।
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डॉलर से दूरी और गोल्ड की ओर रुझान
रिपोर्ट बताती है कि पहली बार अगले 10 वर्षों के लिए अधिक केंद्रीय बैंक डॉलर होल्डिंग घटाने की योजना बना रहे हैं बजाय बढ़ाने के। इस डी-डॉलराइजेशन ट्रेंड का सबसे बड़ा फायदा सोने को मिल रहा है।
डॉलर के प्रति कम होता रुझान: जब से 2023 में GPI श्रृंखला ने रिज़र्व प्रबंधकों (reserve managers) के दीर्घकालिक इरादों को रिकॉर्ड करना शुरू किया है, तब से पहली बार ऐसा हुआ है कि अगले 10 वर्षों में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी बढ़ाने के बजाय उसे घटाने की योजना बनाने वाले केंद्रीय बैंकों की संख्या अधिक है।
इस सर्वेक्षण (Survey) का महत्व क्या है?
कुल मिलाकर, GPI रिपोर्ट 90 केंद्रीय बैंक, सार्वजनिक पेंशन फंड और सॉवरेन वेल्थ फंड के सर्वेक्षण से मिले विचारों पर आधारित है, जो 10 ट्रिलियन डॉलर (10 लाख करोड़ डॉलर) से अधिक की संपत्ति का प्रबंधन करते हैं। इस वार्षिक सर्वे में कुल 90 आधिकारिक वित्तीय संस्थान (जिसमें 74 केंद्रीय बैंक और 16 सार्वजनिक पेंशन व सॉवरेन वेल्थ फंड शामिल हैं) शामिल हैं।
OMFIF दुनिया भर के केंद्रीय बैंक, सॉवरेन वेल्थ फंड, सार्वजनिक पेंशन फंड और निजी क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों के बीच एक पुल (bridge) के रूप में काम करता है। इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक वित्तीय प्रणाली (global financial system) और मौद्रिक नीति में हो रहे बदलावों पर शोध करना और वित्तीय स्थिरता को बढ़ावा देना है।
चूंकि इन 90 संस्थानों के पास दुनिया की दौलत का एक बहुत बड़ा हिस्सा है, इसलिए वे बाजार में जो भी कदम उठाते हैं, उसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है:
- बाजार की दशा तय करना: अगर ये संस्थान किसी एक चीज़ (जैसे सोने) में निवेश बढ़ाने का फैसला करते हैं, तो पूरी दुनिया में सोने के दाम आसमान छूने लगते हैं। वहीं अगर ये किसी मुद्रा (जैसे डॉलर) से दूरी बनाते हैं, तो उस मुद्रा की वैल्यू कमजोर होने लगती है।
- आर्थिक महाशक्तियों का मूड: यह सर्वे दुनिया को यह बताता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को चलाने वाले सबसे बड़े ‘खिलाड़ी’ इस समय दुनिया के हालात (जैसे युद्ध, महंगाई या मंदी) को किस नजरिए से देख रहे हैं।
केंद्रीय बैंक और ज्यादा सोना खरीदना चाहते हैं
अगले 12-24 महीनों में:
- नेट 30% केंद्रीय बैंक अपनी गोल्ड होल्डिंग बढ़ाना चाहते हैं।
- गोल्ड सबसे पसंदीदा एसेट क्लास बनकर उभरा है।
- सरकारी बॉन्ड के बाद सबसे ज्यादा मांग गोल्ड की ही है।
केंद्रीय बैंक के पोर्टफोलियो में गोल्ड की हिस्सेदारी औसतन:
- Government Bonds: 41%
- Gold: 15%
यह दिखाता है कि गोल्ड अब रिज़र्व पोर्टफोलियो का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है।
केंद्रीय बैंक गोल्ड क्यों खरीद रहे हैं?
रिपोर्ट में गोल्ड खरीदने के प्रमुख कारण बताए गए हैं:
- रिज़र्व का विविधीकरण (Diversification) — यह सबसे बड़ा कारण है।
- भू-राजनीतिक जोखिम से सुरक्षा — 51% केंद्रीय बैंकों ने इसे प्रमुख कारण बताया, जो 2024 की तुलना में 11 प्रतिशत अंक अधिक है।
- अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक व्यवस्था को लेकर अनिश्चितता — डॉलर आधारित प्रणाली में बदलाव की संभावना के कारण।
- मुद्रास्फीति से बचाव (Inflation Hedge)।
- सुरक्षित संपत्ति (Safe Asset) के रूप में इसकी भूमिका।
केंद्रीय बैंक को गोल्ड की कीमत में और तेजी की उम्मीद
केंद्रीय बैंक अभी भी सोने को लेकर बेहद आशावादी हैं। 61% केंद्रीय बैंकों का मानना है कि जून 2027 तक सोने की कीमत 5,000 डॉलर से 6,000 डॉलर प्रति औंस के बीच रहेगी। कुछ केंद्रीय बैंक इससे भी अधिक कीमत की संभावना देख रहे हैं।
रिपोर्ट में गोल्ड प्राइस अनुमान का वितरण इस प्रकार दिया गया है:
- 44% केंद्रीय बैंक: 5,000-5,500 डॉलर
- 17% केंद्रीय बैंक: 5,500-6,000 डॉलर
- 8% केंद्रीय बैंक: 6,000-6,500 डॉलर
- 3% केंद्रीय बैंक: 7,000 डॉलर से अधिक
ऊंची कीमत के बावजूद खरीदारी जारी
मई 2026 में सोना लगभग 4,500 डॉलर प्रति औंस के आसपास था, फिर भी केवल 28% केंद्रीय बैंकों ने कहा कि ऊंची कीमतें उनकी खरीदारी को रोक रही हैं। इसका मतलब है कि अधिकांश केंद्रीय बैंक कीमत के बजाय रणनीतिक कारणों से सोना खरीद रहे हैं।
गोल्ड को अब रणनीतिक कोलेटरल माना जा रहा है
OMFIF का मानना है कि भविष्य में सोना केवल रिज़र्व एसेट नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक वित्तीय प्रणाली में Strategic Collateral की भूमिका निभाएगा। इसके लिए OMFIF ने एक नया Gold and Precious Metals Working Group भी बनाया है, जिसमें केंद्रीय बैंक, ग्लोबल बैंक, ट्रेडिंग हाउस, रेगुलेटर और मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर संस्थाएं शामिल हैं।
जर्मन बुंडेसबैंक की राय
जर्मनी के केंद्रीय बैंक के अनुसार: वे अपने गोल्ड रिज़र्व में सक्रिय ट्रेडिंग नहीं करते। लेकिन अन्य केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार हो रही गोल्ड खरीद यह दर्शाती है कि पोर्टफोलियो मैनेजमेंट में सोने का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इसी वजह से वे गोल्ड के लिए अधिक तरल (Liquid) ट्रेडिंग हब विकसित करने का समर्थन करते हैं।
सार्वजनिक फंड (Sovereign Funds और Pension Funds)
हालांकि सार्वजनिक फंड में गोल्ड खरीदने की इच्छा सीमित है, लेकिन:
57% फंड मानते हैं कि अगले 12 महीनों में सोना 4,500-5,000 डॉलर प्रति औंस के बीच रहेगा।
कुछ पेंशन फंड मानते हैं कि सोना “Store of Value” है, लेकिन यह उनके आय उत्पन्न करने के लक्ष्य से मेल नहीं खाता।
रिपोर्ट के अंतिम भाग में एक केंद्रीय बैंक का मुख्य वक्तव्य
सोना एक महत्वपूर्ण संप्रभु (Sovereign) जोखिम-मुक्त रिज़र्व संपत्ति है, जो भू-राजनीतिक अस्थिरता, महंगाई और वैश्विक वित्तीय संकट जैसी परिस्थितियों में सुरक्षित निवेश का विकल्प प्रदान करता है। इसमें किसी तीसरे पक्ष (Counterparty) का जोखिम नहीं होता और इसका पारंपरिक वित्तीय परिसंपत्तियों (Financial Assets) से कम संबंध होता है, इसलिए यह निवेशकों के लिए मूल्य को सुरक्षित रखने का भरोसेमंद माध्यम माना जाता है।
- सोना एक संप्रभु जोखिम-मुक्त रिज़र्व एसेट है।
- भू-राजनीतिक संकट से सुरक्षा देता है।
- मुद्रास्फीति से बचाता है।
- वित्तीय संकट में मूल्य सुरक्षित रखता है।
- इसमें Counterparty Risk नहीं होता।
- पारंपरिक वित्तीय परिसंपत्तियों से इसका संबंध कम होता है।
रिपोर्ट का निष्कर्ष (Conclusion)
OMFIF की Global Public Investor 2026 Report का सबसे बड़ा संदेश है:
- केंद्रीय बैंक रिकॉर्ड मात्रा में सोना खरीद रहे हैं।
- डॉलर से धीरे-धीरे दूरी बन रही है।
- गोल्ड अब केवल Safe Haven नहीं बल्कि Strategic Reserve Asset बन गया है।
- केंद्रीय बैंक अगले 12 महीनों में सोने को 5,000 डॉलर-6,000 डॉलर प्रति औंस तक जाते हुए देख रहे हैं।
- भू-राजनीतिक तनाव और बदलती वैश्विक मौद्रिक व्यवस्था आने वाले वर्षों में गोल्ड की मांग को मजबूत बनाए रख सकती है।
सोने, चांदी की कीमतों से जुड़े सवाल-जवाब, FAQ’s
1. OMFIF Global Public Investor 2026 रिपोर्ट का सबसे बड़ा निष्कर्ष क्या है?
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अब सोने को केवल निवेश का साधन नहीं मान रहे हैं। वे इसे रणनीतिक रिज़र्व एसेट (Strategic Reserve Asset), सुरक्षित निवेश (Safe Haven) और भू-राजनीतिक तथा आर्थिक अनिश्चितताओं से बचाव के प्रभावी माध्यम के रूप में देख रहे हैं। इससे वैश्विक रिज़र्व रणनीति में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है।
2. केंद्रीय बैंक डॉलर की बजाय सोने पर अधिक भरोसा क्यों जता रहे हैं?
रिपोर्ट बताती है कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई, वैश्विक वित्तीय जोखिम और डॉलर आधारित मौद्रिक व्यवस्था को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के कारण केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाना चाहते हैं। इसी वजह से वे डॉलर की हिस्सेदारी घटाकर सोने का रिज़र्व लगातार बढ़ा रहे हैं।
3. OMFIF रिपोर्ट के अनुसार आने वाले समय में सोने की कीमत को लेकर क्या अनुमान है?
रिपोर्ट के अनुसार, 61% केंद्रीय बैंकों का मानना है कि जून 2027 तक सोने की कीमत 5,000 से 6,000 डॉलर प्रति औंस के बीच पहुंच सकती है। वहीं कुछ केंद्रीय बैंक इससे भी अधिक कीमत की संभावना जता रहे हैं, जो सोने के प्रति उनके मजबूत दीर्घकालिक विश्वास को दर्शाता है।
4. केंद्रीय बैंक ऊंची कीमतों के बावजूद सोने की खरीदारी क्यों जारी रखे हुए हैं?
रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकांश केंद्रीय बैंक अल्पकालिक कीमतों पर नहीं बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखकर सोना खरीद रहे हैं। उनके लिए रिज़र्व का विविधीकरण, मुद्रास्फीति से सुरक्षा, वित्तीय स्थिरता और भू-राजनीतिक जोखिमों से बचाव, कीमत से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।
5. OMFIF रिपोर्ट वैश्विक वित्तीय व्यवस्था के भविष्य को लेकर क्या संकेत देती है?
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि दुनिया धीरे-धीरे डी-डॉलराइजेशन (De-dollarisation) की दिशा में बढ़ रही है। केंद्रीय बैंक रिकॉर्ड स्तर पर सोना खरीद रहे हैं और भविष्य में गोल्ड केवल सुरक्षित निवेश नहीं बल्कि वैश्विक वित्तीय प्रणाली में एक Strategic Reserve Asset और Strategic Collateral के रूप में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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