Gold Price: पिछले एक सप्ताह में सर्राफा बाजार में सोना और चांदी खरीदना काफी महंगा हो गया है। 31 जुलाई 2026 से 06 अगस्त 2026 के बीच सोने और चांदी की कीमतों में अच्छी तेजी दर्ज की गई। इस दौरान 24 कैरेट सोना 5,500 रुपए प्रति 10 ग्राम महंगा हुआ, जबकि चांदी 9,500 रुपए प्रति किलोग्राम उछल गई। सिर्फ 24 कैरेट ही नहीं, बल्कि 22, 18, 14 और 9 कैरेट सोने के दामों में भी अच्छी बढ़त देखने को मिली।
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एक हफ्ते में कितना महंगा हुआ सोना-चांदी?
पिछले एक सप्ताह में सर्राफा बाजार में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में मजबूत तेजी देखने को मिली। नीचे दिए गए ग्राफिक में 31 जुलाई से 06 अगस्त 2026 तक सभी प्रमुख कैरेट के सोने और चांदी की कीमतों में हुए बदलाव को देखें।

तेजी की सबसे बड़ी वजह क्या रही?
- भू-राजनीतिक घटनाक्रम (Geopolitical Developments) के बीच सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग बढ़ने से सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली।
- अमेरिकी डॉलर (US Dollar) में कमजोरी और वैश्विक मौद्रिक नीति (Global Monetary Policy) को लेकर बदलती उम्मीदों ने भी कीमती धातुओं को सपोर्ट दिया।
- लेमोन मार्केट्स डेस्क (Lemonn Markets Desk) के रिसर्च हेड गौरव गर्ग के अनुसार, लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में सोने की कीमतों में बढ़त इसलिए दर्ज हुई क्योंकि निवेशकों ने बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और कमजोर अमेरिकी डॉलर के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की खरीद बढ़ाई।
- विश्लेषकों का कहना है कि चांदी की कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह निवेशकों द्वारा नए सौदों (Fresh Positions) का बनाया जाना भी रहा।
- चॉइस ब्रोकिंग (Choice Broking) की कमोडिटी फंडामेंटल एनालिस्ट पिंकी यादव के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने के लिए बातचीत में प्रगति की खबरों से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की चिंताएं कम हुईं, जिससे कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में गिरावट आई।
- कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई (Inflation) का दबाव कम हो सकता है। इससे ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदों में बदलाव आता है और सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं की मांग को समर्थन मिलता है।
RBI की मौद्रिक नीति और उसका असर
यह तेजी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के उस फैसले के साथ देखने को मिली, जिसमें केंद्रीय बैंक ने लगातार चौथी मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट को 5.25% पर अपरिवर्तित रखा।
CapitalXB के सह-संस्थापक और कार्यकारी निदेशक अजिताभ भारती ने कहा कि RBI का रेपो रेट में कोई बदलाव न करने का फैसला आर्थिक विकास को समर्थन देने और महंगाई से जुड़े जोखिमों पर नजर बनाए रखने के बीच संतुलन स्थापित करने की रणनीति को दर्शाता है।
आगे किस पर रहेगी बाजार की नजर?
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका के Non-Farm Payrolls (NFP), Weekly Jobless Claims, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़े संकेत, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स, बॉन्ड यील्ड और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर रहेगी। यदि अमेरिकी आर्थिक आंकड़े उम्मीद से कमजोर आते हैं, तो सोना और चांदी की कीमतों में तेजी का सिलसिला जारी रह सकता है। वहीं, मजबूत आंकड़ों की स्थिति में बाजार में अल्पकालिक मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है।
सोने-चांदी से जुड़े FAQ’s
1. पिछले एक सप्ताह में सोने और चांदी की कीमतों में कितना बदलाव आया?
31 जुलाई से 06 अगस्त 2026 के बीच 24 कैरेट सोना 5,500 रुपये प्रति 10 ग्राम महंगा हुआ, जबकि चांदी 9,500 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ी। 22, 18, 14 और 9 कैरेट सोने की कीमतों में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई।
2. इस सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों में तेजी क्यों आई?
सोने-चांदी की कीमतों में तेजी की प्रमुख वजह सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की बढ़ती मांग, कमजोर अमेरिकी डॉलर, बदलती वैश्विक मौद्रिक नीति की उम्मीदें, भू-राजनीतिक तनाव और चांदी में निवेशकों द्वारा नए सौदों (Fresh Positions) का बनाया जाना रहा।
3. RBI के रेपो रेट फैसले का सोने पर क्या असर पड़ा?
RBI ने लगातार चौथी बार रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा। इस फैसले ने आर्थिक स्थिरता और महंगाई पर संतुलित दृष्टिकोण का संकेत दिया, जिससे निवेशकों का भरोसा बना रहा और कीमती धातुओं को समर्थन मिला।
4. कच्चे तेल और अमेरिकी डॉलर का सोने-चांदी की कीमतों से क्या संबंध है?
कमजोर अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई का दबाव कम होने की उम्मीद बढ़ती है। इससे ब्याज दरों को लेकर बाजार की धारणा बदलती है और सोने-चांदी जैसी सुरक्षित निवेश वाली परिसंपत्तियों की मांग बढ़ सकती है।
5. आने वाले दिनों में निवेशकों को किन प्रमुख संकेतों पर नजर रखनी चाहिए?
निवेशकों को अमेरिका के Non-Farm Payrolls (NFP), Weekly Jobless Claims, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़े संकेत, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स, बॉन्ड यील्ड और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये सभी सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय कर सकते हैं।
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डिस्क्लेमर: ये न्यूज सिर्फ जानकारी के लिए बनाई गई है, निवेश या ट्रेडिंग की सलाह नहीं है। स्टोरी में दी गई राय एक्सपर्ट और ब्रोकरेज हाउस की है। गोल्ड प्राइस टुडे से जुड़े लोग निजी तौर पर सोने, चांदी की ट्रेडिंग नहीं करते हैं। हमारी सोने, चांदी में कोई पोजीशन नहीं है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें। सोने चांदी में निवेश जोखिम का काम है अपने विवेक का इस्तेमाल करें। आपको होने वाले किसी भी नुकसान की हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है।




