AIJGF: भारत के गोल्ड इकोसिस्टम में एक बड़े नीतिगत हस्तक्षेप के तहत ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) ने माननीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल को एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन का मुख्य फोकस भारत के बढ़ते Gold Import Bill को कम करना और देश के लगभग 3.5 करोड़ लोगों की आजीविका को सुरक्षित रखना है, जो ज्वेलरी और बुलियन सेक्टर पर निर्भर हैं। संगठन ने स्पष्ट रूप से Bullion Bank Framework बनाने की मांग की है, जिससे देश में पड़े निष्क्रिय सोने को आर्थिक रूप से उत्पादक उपयोग में लाया जा सके। फेडरेशन ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सोना खरीद को हतोत्साहित करने वाली किसी भी व्यापक अपील या नीति का सीधा और नकारात्मक असर छोटे ज्वेलर्स, सुनारों, कारीगरों, आर्टिजन्स, मैन्युफैक्चरर्स, रिफाइनर्स, हॉलमार्किंग सेंटरों, ट्रांसपोर्टर्स और दैनिक मजदूरी से जुड़े लाखों परिवारों पर पड़ सकता है।
ज्वेलरी सेक्टर में आजीविका पर खतरे को लेकर चिंता
AIJGF ने चिंता व्यक्त की कि सोने की खरीद को हतोत्साहित करने वाली किसी भी व्यापक नीति का सीधा असर छोटे ज्वेलर्स, सुनारों, कारीगरों, मैन्युफैक्चरर्स, रिफाइनर्स, हॉलमार्किंग सेंटरों, ट्रांसपोर्टर्स और दैनिक मजदूरी से जुड़े लाखों परिवारों पर पड़ सकता है।
फेडरेशन के अनुसार लगभग 3.5 करोड़ भारतीय और उनके परिवार इस इकोसिस्टम पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर हैं। इसलिए Gold Import Bill कम करने का समाधान मांग को दबाने में नहीं, बल्कि देश के भीतर मौजूद निष्क्रिय सोने को उत्पादक अर्थव्यवस्था में बदलने में होना चाहिए।
Bullion Bank Framework की मांग
AIJGF ने भारत में एक मजबूत और रेगुलेटेड Bullion Bank Framework बनाने की मांग की है। इस प्रस्ताव के तहत घरेलू सोना, मंदिरों का सोना, Gold ETF का सोना और संस्थागत सोना एकत्र कर उसे ज्वेलर्स, मैन्युफैक्चरर्स, एक्सपोर्टर्स और रिफाइनर्स तक उत्पादक सप्लाई के रूप में पहुंचाया जाएगा।
इससे देश में सोने की उपलब्धता बढ़ेगी, आयात पर निर्भरता कम होगी और एक मजबूत घरेलू गोल्ड सप्लाई चेन विकसित हो सकेगी।
AIJGF राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा का बयान
भारत में सोना केवल लग्जरी उत्पाद नहीं है, बल्कि यह संस्कृति, परंपरा, बचत, महिला सुरक्षा, विवाह व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ है। इसलिए सोने की मांग को केवल इंपोर्ट बर्डन के रूप में देखना उचित नहीं होगा। आवश्यकता इस बात की है कि भारत अपने आइडल गोल्ड को नेशनल प्रोडक्टिव एसेट में बदले।
AIJGF महासचिव नितिन केडिया का बयान
भारत को विदेशी मुद्रा बचाने और आजीविका बचाने में से किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है। सही नीति ढांचे के साथ दोनों लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। डिमांड सप्रेशन के बजाय Bullion Bank जैसा स्ट्रक्चरल सोल्यूशन देश के लिए बेहतर और दीर्घकालिक रास्ता हो सकता है।
Gold ETF और बुलियन बैंक को जोड़ने का प्रस्ताव
ज्ञापन में AIJGF ने यह भी सुझाव दिया कि Gold ETFs को सख्त रेगुलेटरी सेफगार्ड्स (regulatory safeguards) के तहत अपने फिजिकल गोल्ड होल्डिंग्स का सीमित हिस्सा Bullion Bank को उधार देने की अनुमति दी जाए। इससे डोमेस्टिक गोल्ड लेंडिंग पूल तैयार होगा, ज्वेलर्स को स्थानीय सोने की सप्लाई मिलेगी, फ्रेश इंपोर्ट्स घटेंगे और ETF इन्वेस्टर्स को भी अतिरिक्त यील्ड मिल सकती है।
कंसल्टेशन कमेटी बनाने का सुझाव
AIJGF ने सरकार से आग्रह किया कि इस विषय पर एक Consultation Committee बनाई जाए, जिसमें सरकार, ज्वेलरी उद्योग, बुलियन मार्केट, वित्तीय संस्थान और रेगुलेटरी संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हों।
संगठन ने सुझाव दिया कि माननीय सांसद श्री प्रवीण खंडेलवाल के नेतृत्व में ऐसी समिति बनाई जाए, ताकि सभी हितधारकों से चर्चा कर एक व्यावहारिक और राष्ट्रहितकारी समाधान तैयार किया जा सके।
AIJGF की प्रमुख मांगें
- भारत में रेगुलेटेड Bullion Bank Framework बनाया जाए।
- देश में पड़े आइडल गोल्ड को मोबिलाइज़ कर प्रोडक्टिव सर्कुलेशन में लाया जाए।
- Gold Import Bill घटाने के लिए ज्वेलर्स के साथ मिलकर नीति बनाई जाए।
- Gold ETFs को लिमिटेड गोल्ड लेंडिंग की अनुमति दी जाए।
- छोटे ज्वेलर्स, सुनारों, कारीगरों और आर्टिसन्स की आजीविका सुरक्षित रखी जाए।
- ज्वेलरी सेक्टर को नुकसान पहुंचाने वाली नेगेटिव मार्केट सेंटीमेंट से बचा जाए।
- सरकार और ट्रेड बॉडीज़ के बीच कंसल्टेशन मेकैनिजम बनाया जाए।
AIJGF ने कहा कि भारत को अपने ज्वेलरी इकोसिस्टम को कमजोर नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे आधुनिक और अधिक उत्पादक बनाना चाहिए। संगठन ने दोहराया कि सही नीति ढांचे के साथ भारत अपने निष्क्रिय सोने को एक मजबूत आर्थिक संपत्ति में बदल सकता है, जिससे आयात पर निर्भरता घटेगी, रोजगार सुरक्षित रहेगा और देश की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी।
AIJGF के ज्ञापन से जुड़े कुछ सवाल-जवाब, FAQ’s
1. AIJGF ने सरकार से मुख्य रूप से क्या मांग की है?
AIJGF ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि देश में एक रेगुलेटेड Bullion Bank Framework स्थापित किया जाए। इस प्रणाली के माध्यम से घरेलू घरों, मंदिरों, संस्थानों और ETF में पड़े निष्क्रिय सोने को एकत्र कर उसे आर्थिक रूप से उत्पादक उपयोग में लाया जाए, जिससे Gold Import Bill भी कम हो सके।
2. इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य भारत के बढ़ते Gold Import Bill को नियंत्रित करना और साथ ही ज्वेलरी एवं बुलियन सेक्टर से जुड़े लगभग 3.5 करोड़ लोगों की आजीविका को सुरक्षित रखना है, ताकि आर्थिक विकास और रोजगार दोनों संतुलित रह सकें।
3. Bullion Bank Framework क्या होता है और यह कैसे काम करेगा?
Bullion Bank Framework एक ऐसी प्रणाली होगी जिसमें घरेलू सोना, मंदिरों का सोना, Gold ETF का सोना और अन्य संस्थागत सोना एकत्र किया जाएगा। इस सोने को ज्वेलर्स, मैन्युफैक्चरर्स, एक्सपोर्टर्स और रिफाइनर्स को कच्चे माल के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे नया आयात कम होगा।
4. क्या इस योजना से सोने की खरीद और ज्वेलरी उद्योग पर असर पड़ेगा?
AIJGF का कहना है कि सोने की मांग को दबाने वाली किसी भी नीति से छोटे ज्वेलर्स, सुनारों, कारीगरों, आर्टिजन्स, ट्रांसपोर्टर्स और मजदूर वर्ग पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसलिए मांग को रोकने के बजाय उसे व्यवस्थित और उत्पादक रूप में बदलने की जरूरत है।
5. Gold ETFs और निवेशकों की इसमें क्या भूमिका होगी?
प्रस्ताव के अनुसार Gold ETFs को सख्त रेगुलेटरी नियमों के तहत अपने भौतिक सोने का सीमित हिस्सा Bullion Bank को उधार देने की अनुमति दी जा सकती है। इससे घरेलू सोने की उपलब्धता बढ़ेगी, आयात कम होगा और निवेशकों को अतिरिक्त रिटर्न (yield) का लाभ भी मिल सकता है।
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