US Iran War: अमेरिकी राजनीति में एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। पिछले लगभग तीन महीनों (100 दिनों) से चल रहे ईरान संघर्ष के बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपनी ही पार्टी के भीतर भारी विरोध का सामना करना पड़ा है। रिपब्लिकन-नियंत्रित अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) ने बुधवार (3 जून 2026) को एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया है, जिसका सीधा उद्देश्य राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान के खिलाफ युद्ध जारी रखने से रोकना और अमेरिकी सेना की शक्तियों को सीमित करना है।
प्रतिनिधिसभा ने इस ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ (War Powers Resolution) को 215-208 के मामूली अंतर से मंजूरी दी। इस प्रस्ताव के पास होने का मुख्य संदेश यह है कि अब राष्ट्रपति ट्रंप संसद (Congress) की आधिकारिक मंजूरी या युद्ध की स्पष्ट घोषणा के बिना ईरान में अमेरिकी सैनिकों का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे और उन्हें वहां से अपनी सेना वापस बुलानी होगी।
स्पीकर माइक जॉनसन रहे नाकाम
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बात यह है कि वर्तमान में अमेरिकी संसद के इस सदन (House) में राष्ट्रपति ट्रंप की अपनी ‘रिपब्लिकन पार्टी’ का बहुमत है। इसके बावजूद, हाउस स्पीकर माइक जॉनसन इस प्रस्ताव को पास होने से रोकने में पूरी तरह नाकाम रहे।
ट्रंप की अपनी ही पार्टी के भीतर चल रहे इस युद्ध को लेकर बेचैनी इतनी बढ़ चुकी थी कि चार रिपब्लिकन सांसदों ने अपनी पार्टी की लाइन तोड़ दी। सांसद थॉमस मैसी, ब्रायन फिट्ज़पैट्रिक, टॉम बैरेट और वॉरेन डेविडसन ने विपक्ष (डेमोक्रेट्स) का हाथ मिलाया, जिसके कारण यह ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित हो सका।
‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन 1973’ का हुआ इस्तेमाल
अमेरिकी संसद ने राष्ट्रपति की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए अपने ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन 1973’ के कड़े नियम का इस्तेमाल किया है। इस कानून के तहत:
- यदि अमेरिकी राष्ट्रपति संसद की पूर्व अनुमति के बिना कहीं भी सेना भेजता है, तो युद्ध शुरू होने के 90 दिनों के भीतर उसे संसद से आधिकारिक मंजूरी लेना अनिवार्य होता है।
- चूंकि ईरान के साथ इस युद्ध को शुरू हुए 90 दिन से अधिक (लगभग 100 दिन) का समय बीत चुका है, इसलिए संसद ने अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इस पर रोक लगा दी है।
युद्ध की भारी कीमत और जनता का बढ़ता असंतोष
अमेरिकी संसद और जनता में इस संघर्ष को लेकर बढ़ते असंतोष की सबसे बड़ी वजह इस युद्ध का लंबा खिंचना और इस पर होने वाला बेहिसाब खर्च है।
पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस युद्ध में अब तक अमेरिका के 29 अरब डॉलर (यानी करीब 2.4 लाख करोड़ रूपए) से अधिक स्वाहा हो चुके हैं। इस भारी आर्थिक नुकसान के साथ-साथ कई अमेरिकी सैनिकों को भी अपनी जान गंवानी पड़ी है, जिसने अमेरिकी नागरिकों और सांसदों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। अब इस प्रस्ताव के पास होने के बाद ट्रंप प्रशासन पर युद्ध को तुरंत रोकने का भारी दबाव बन गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल, FAQ’s
1. अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने कौन सा प्रस्ताव पारित किया है?
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ पारित किया है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कांग्रेस की मंजूरी के बिना ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखने से रोकना है।
2. यह प्रस्ताव कितने मतों से पारित हुआ?
यह प्रस्ताव 215-208 के करीबी अंतर से पारित हुआ। चार रिपब्लिकन सांसदों ने अपनी पार्टी की लाइन से हटकर डेमोक्रेट्स का समर्थन किया, जिससे प्रस्ताव को बहुमत मिला।
3. वॉर पावर्स रेजोल्यूशन 1973 क्या है?
यह अमेरिकी कानून राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों पर नियंत्रण रखता है। इसके तहत यदि राष्ट्रपति बिना कांग्रेस की अनुमति के सेना भेजते हैं, तो 90 दिनों के भीतर उन्हें कांग्रेस से औपचारिक मंजूरी प्राप्त करनी होती है।
4. ट्रंप को अपनी ही पार्टी के विरोध का सामना क्यों करना पड़ा?
ईरान संघर्ष के लंबे समय तक चलने, युद्ध पर भारी खर्च और अमेरिकी सैनिकों की मौतों के कारण कई रिपब्लिकन सांसदों में असंतोष बढ़ गया। इसी वजह से कुछ सांसदों ने ट्रंप के खिलाफ जाकर प्रस्ताव का समर्थन किया।
5. इस युद्ध की लागत और प्रभाव कितना रहा है?
पेंटागन के अनुसार, ईरान संघर्ष में अब तक अमेरिका 29 अरब डॉलर से अधिक खर्च कर चुका है। इसके अलावा कई अमेरिकी सैनिकों की जान भी गई है, जिससे जनता और सांसदों के बीच युद्ध को लेकर विरोध और दबाव बढ़ा है।
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