US-Iran Tension: इस साल के शुरुआत से ही ईरान में हो रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों और उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज अपने भाषण में ईरान के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि वह किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु संपन्न राष्ट्र नहीं बनने देंगे। हालांकि, राष्ट्रपति ने कूटनीतिक समाधान (Diplomacy) के दरवाजे खुले रखने की बात कही, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर मौजूदा गतिरोध बरकरार है। ट्रंप ने अपने भाषण के दौरान ईरान की तीखी आलोचना की और उसे “दुनिया में आतंकवाद का नंबर 1 प्रायोजक” करार दिया।
उन्होंने ‘सेव अमेरिका एक्ट’ (SAVE America Act) का भी आह्वान किया, जिसके तहत संघीय चुनावों (Federal Elections) में मतदाता पंजीकरण के लिए जन्म प्रमाण पत्र या पासपोर्ट की आवश्यकता होगी और मतदान केंद्रों पर फोटो पहचान पत्र (Photo ID) अनिवार्य होगा।
परमाणु वार्ता के बीच युद्ध की आशंकाएं बरकरार (Fears of War Amid Nuclear Talks)
ट्रंप का यह भाषण ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। हालांकि, दोनों देश 26 फरवरी को जिनेवा में परमाणु समझौते पर बातचीत करने वाले हैं। इस वार्ता में ट्रंप द्वारा दुनिया भर में, विशेष रूप से ईरान और वेनेजुएला में, त्वरित सैन्य कार्रवाई करने की अपनी क्षमता का उल्लेख करने की संभावना है।
ट्रंप का यह संबोधन ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के दो एयरक्राफ्ट कैरियर मध्य पूर्व (Middle East) में तैनात किए गए हैं। मंगलवार को ट्रंप ने कहा कि ईरान “बेसब्री से समझौता करना चाहता है।”
Fox News के अनुसार ट्रम्प ने कहा की गुरुवार को ईरान बेसब्री से समझौता करना चाहता है। लेकिन ईरान सिर्फ इतना नहीं कह पा रहा है कि ‘हम परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे।
डील नहीं तो बहुत बुरा दिन होगा (It Will be a Very Bad Day)
इस सप्ताह की शुरुआत में ट्रंप ने कहा था कि वह ईरान के साथ समझौता करना पसंद करेंगे, लेकिन यदि कोई समझौता नहीं हुआ तो ईरान के लिए “बहुत बुरा दिन” होगा, ऐसी चेतावनी भी दी थी। इसी बात को दोहराते हुए अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी कहा कि ईरान के लिए समझौता करना “समझदारी भरा कदम” होगा और यही परिणाम राष्ट्रपति ट्रंप चाहते हैं।
सोने की कीमतों पर संभावित प्रभाव (Impact On Gold Prices)
अमेरिका–ईरान तनाव, युद्ध की आशंकाओं और परमाणु गतिरोध की स्थिति आमतौर पर वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ाती है। ऐसे परिदृश्य में सोना सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में उभरता है, जिससे कीमतों पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ सकते हैं:
- सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ेगी: भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोने में शिफ्ट करते हैं। इससे सोने की कीमतों को मजबूती मिल सकती है।
- कच्चे तेल की कीमतों का असर: मध्य पूर्व (Middle East) में सैन्य तनाव से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। तेल महंगा होने से महंगाई (Inflation) का दबाव बढ़ेगा, जो सोने को हेज (Hedge) के रूप में समर्थन दे सकता है।
- समझौता होने पर दबाव: यदि जिनेवा वार्ता में सकारात्मक प्रगति होती है और तनाव कम होता है, तो सुरक्षित निवेश की मांग घट सकती है, जिससे सोने की कीमतों में मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है।
- केंद्रीय बैंकों की रणनीति: भू-राजनीतिक अनिश्चितता के दौर में कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाते हैं। इससे दीर्घकाल में कीमतों को संरचनात्मक समर्थन मिल सकता है।
US-Iran Tension से जुड़े कुछ जरुरी सवाल-जवाब,FAQ’s
1. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव क्यों बढ़ा है?
ईरान के परमाणु कार्यक्रम, सरकार विरोधी प्रदर्शनों और क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। दोनों देशों के बीच अविश्वास और कड़े बयानों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।
2. ट्रंप ने अपने भाषण में क्या कहा?
डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि वह किसी भी हालत में ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देंगे। हालांकि उन्होंने कूटनीतिक समाधान के लिए दरवाजे खुले रखने की भी बात कही, लेकिन सख्त चेतावनी भी दी।
3. जिनेवा वार्ता का क्या महत्व है?
26 फरवरी को जिनेवा में होने वाली परमाणु वार्ता को दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के अहम अवसर के रूप में देखा जा रहा है। यदि सकारात्मक परिणाम निकलता है तो युद्ध की आशंकाएं कम हो सकती हैं।
4. मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य तैनाती का क्या संकेत है?
अमेरिका ने मध्य पूर्व में दो एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात किए हैं, जो यह दर्शाता है कि वाशिंगटन संभावित सैन्य विकल्पों के लिए भी तैयार है। इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।
5. अमेरिका-ईरान तनाव का सोने की कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है?
भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर रुख करते हैं। यदि तनाव बढ़ता है तो सोने की कीमतों में तेजी आ सकती है, जबकि समझौता होने पर मुनाफावसूली देखी जा सकती है।
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