Trump Tariff, Donuld Trump, USA Supreme Court, Global Tariff: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति को एक बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने ट्रम्प टैरिफ को अवैध ठहराया है। कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि उनके प्रशासन के पास आपातकालीन शक्तियों के तहत व्यापक वैश्विक टैरिफ (Global Tariffs) लगाने का कानूनी अधिकार नहीं था।
6-3 के बहुमत से दिए गए एक ऐतिहासिक फैसले में, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) किसी भी राष्ट्रपति को आयात पर व्यापक और चौतरफा टैरिफ (Tariffs) लगाने का अधिकार नहीं देता है।
इस घटनाक्रम पर सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी तेजी आ गई; कॉमेक्स (COMEX) पर सोना $120 से अधिक की बढ़त के साथ $5,100 के स्तर को पार कर गया, वहीं चांदी भी लगभग $7 की तेजी के साथ $84 के स्तर के ऊपर पहुंच गई।”
अरबों डॉलर के रिफंड का खतरा (Billions of Dollars at Refund Risk)
अदालत के इस फैसले ने उन दावों के लिए दरवाजे खोल दिए हैं, जिनमें कंपनियों द्वारा भुगतान किए गए टैरिफ के बदले अरबों डॉलर के रिफंड की मांग की जा सकती है। यह राशि संभावित रूप से दसियों अरबों डॉलर तक पहुंच सकती है, जो अमेरिकी खजाने पर भारी पड़ सकती है।
ट्रंप की जवाबी घोषणा, 10 प्रतिशत के नए टैरिफ लागू (New Global Tariffs of 10%)
इस कानूनी झटके के बावजूद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख में कोई नरमी नहीं देखी गई। अदालत के फैसले के कुछ ही घंटों के भीतर, ट्रंप ने संवाददाताओं के सामने पेश होकर टैरिफ के एक नए दौर की घोषणा कर दी। उनकी इस घोषणा ने स्पष्ट संकेत दिया है कि कानूनी अड़चनों के बावजूद उनका ‘ट्रेड एजेंडा’ रुकने वाला नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद, राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी व्यापार नीति को और कड़ा करते हुए 10 प्रतिशत के नए वैश्विक टैरिफ (Global Tariff) की घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नया शुल्क मौजूदा शुल्कों के अतिरिक्त लगाया जाएगा। ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यापार से संबंधित प्रमुख टैरिफ बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे।
राष्ट्रपति ट्रंप का आधिकारिक बयान
मीडिया को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा:
“तत्काल प्रभाव से, धारा 232 (Section 232) के तहत सभी राष्ट्रीय सुरक्षा टैरिफ और मौजूदा धारा 301 (Section 301) के टैरिफ लागू रहेंगे। आज, मैं धारा 122 (Section 122) के तहत एक आदेश पर हस्ताक्षर करूँगा ताकि हमारे पहले से वसूले जा रहे सामान्य टैरिफ के ऊपर 10% वैश्विक टैरिफ लगाया जा सके।”
ट्रंप का कड़ा रुख, नहीं थमेगी व्यापार नीति (Trade Policy will not Stop)
कानूनी चुनौतियों के बावजूद, राष्ट्रपति ट्रंप ने दृढ़ता से कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अमेरिकी व्यापार नीति को नया रूप देने के उनके प्रयासों की गति धीमी नहीं होगी। उन्होंने तर्क दिया कि अपनी आर्थिक रणनीति को आगे बढ़ाने और राजस्व (Revenue) जुटाने के लिए अब उनके पास और भी “मजबूत” विकल्प उपलब्ध हैं।
भारत को टैरिफ देना होगा (Tariff Remains the same for India)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी टैरिफ नीति में हाल के घटनाक्रमों के बावजूद भारत के साथ मौजूदा व्यापार ढांचा (Trade Framework) बिना किसी बदलाव के जारी रहेगा।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत के साथ हुआ व्यापार समझौता या ढांचा अभी भी कायम रहेगा, तो ट्रंप ने कहा:
“कुछ भी नहीं बदलेगा। उन्हें (भारत को) टैरिफ देना होगा। और हमें कोई टैरिफ नहीं देना होगा। यह उस स्थिति का बिल्कुल उल्टा है जैसा पहले हुआ करता था।”
क्या है धारा 122? (Section 122)
अमेरिका के Trade Act of 1974 के तहत आने वाला Section 122 राष्ट्रपति को विशेष परिस्थितियों में आयात पर अस्थायी प्रतिबंध या टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। यह प्रावधान तब लागू किया जाता है जब अमेरिका को गंभीर भुगतान संतुलन (Balance of Payments) घाटे या डॉलर पर असामान्य दबाव का सामना करना पड़े।
सेक्शन 122 के तहत राष्ट्रपति के अधिकार
- अधिकतम 15% तक का अस्थायी आयात शुल्क (Tariff) लगाने का अधिकार
- या आयात पर मात्रा-आधारित प्रतिबंध (Quota) लागू करने की शक्ति
- यह कदम सामान्यतः 150 दिनों (लगभग 5 महीने) तक लागू रह सकता है
इस प्रावधान की खास बात यह है कि इसे लागू करने के लिए विस्तृत जांच प्रक्रिया (जैसे सेक्शन 301 या 232 में होती है) जरूरी नहीं होती।
अन्य टैरिफ प्रावधानों से अलग
- Section 232 राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा होता है।
- Section 301 अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ इस्तेमाल होता है।
- जबकि Section 122 मुख्य रूप से भुगतान संतुलन और मुद्रा दबाव से संबंधित स्थितियों के लिए बनाया गया है।
संक्षेप में, सेक्शन 122 अमेरिकी राष्ट्रपति को सीमित अवधि के लिए व्यापक लेकिन अस्थायी आयात शुल्क लगाने की कानूनी शक्ति प्रदान करता है, ताकि आर्थिक असंतुलन को नियंत्रित किया जा सके।
Global Tariff से जुड़े कुछ सवाल जवाब, FAQ’s
1. सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के किस फैसले को असंवैधानिक ठहराया?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) राष्ट्रपति को व्यापक और सभी देशों पर लागू होने वाले वैश्विक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता। इसलिए ट्रंप प्रशासन द्वारा आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए टैरिफ कानूनी रूप से वैध नहीं थे।
2. इस फैसले से अमेरिकी सरकार पर क्या आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है?
इस निर्णय के बाद उन कंपनियों को राहत मिल सकती है जिन्होंने भारी आयात शुल्क चुकाया था। अब वे अदालत में जाकर रिफंड की मांग कर सकती हैं। अनुमान है कि यह रकम अरबों डॉलर तक पहुंच सकती है, जिससे अमेरिकी खजाने पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है।
3. कोर्ट के फैसले के बावजूद ट्रंप ने क्या कदम उठाया?
फैसले के कुछ घंटों के भीतर ट्रंप ने धारा 122 के तहत 10% नए वैश्विक टैरिफ लगाने की घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नया शुल्क मौजूदा टैरिफ के अतिरिक्त होगा और उनकी व्यापार नीति में कोई नरमी नहीं आएगी।
4. क्या सेक्शन 232 और 301 के तहत लगाए गए टैरिफ जारी रहेंगे?
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सेक्शन 232 (स्टील और एल्युमिनियम) और सेक्शन 301 (चीन से आयात) के तहत लगाए गए मौजूदा टैरिफ बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे।
5. भारत के साथ अमेरिकी टैरिफ नीति में क्या बदलाव आया है?
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि भारत के साथ मौजूदा व्यापार ढांचा और टैरिफ व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि भारत को पहले की तरह टैरिफ देना होगा, जबकि अमेरिका को भारतीय आयात पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ेगा।
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