Friday, March 6, 2026
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Silver Market Tightening: फिजिकल डिमांड के दबाव में पेपर प्राइस सिस्टम कमजोर

Silver Market Tightening, Silver Market Update, Global Silver Market: पश्चिमी देशों के सिल्वर वॉल्ट्स से लगातार हो रही निकासी वैश्विक चांदी बाजार में एक बड़े संरचनात्मक बदलाव का संकेत दे रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, अब फिजिकल डिमांड कागजी (पेपर-बेस्ड) प्राइसिंग मैकेनिज्म पर हावी होती नजर आ रही है, जिससे बाजार में कसाव बढ़ रहा है।

COMEX स्टॉक्स में तेज गिरावट (COMEX stocks fall sharply)

11 फरवरी 2026 के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, रजिस्टर्ड सिल्वर श्रेणी में एक ही दिन में 32.56 लाख औंस की कटौती दर्ज हुई। इसके साथ कुल रजिस्टर्ड स्टॉक 10 करोड़ औंस के स्तर से नीचे फिसल गया। वहीं एलीजिबल कैटेगरी से भी करीब 47 लाख औंस की भौतिक निकासी हुई, जिससे 24 घंटे में सिस्टम से कुल 47 लाख औंस चांदी बाहर चली गई।

David Morgan का विश्लेषण (David Morgan’s analysis)

David Morgan, The Morgan Report के प्रकाशक, मानते हैं कि यह स्थिति वैश्विक सिल्वर मार्केट की “प्लंबिंग” पर स्थानीय स्तर पर भारी दबाव को दर्शाती है। उनका कहना है कि अब फिजिकल मार्केट, पेपर प्राइस पर नियंत्रण स्थापित कर रहा है।

शंघाई बनाम पश्चिमी बाजार: बढ़ता प्रीमियम

यह अंतर सबसे ज्यादा शंघाई सिल्वर बेंचमार्क में दिख रहा है, जो फिलहाल पश्चिमी स्पॉट कीमतों से करीब 10 डॉलर ऊपर कारोबार कर रहा है। सामान्य तौर पर आर्बिट्राज से यह अंतर कम हो जाता है, लेकिन पूंजी नियंत्रण और शिपिंग लॉजिस्टिक्स जैसी बाधाएं इस गैप को बनाए हुए हैं।

COMEX और शंघाई एक्सचेंज की अलग भूमिका (Different roles of COMEX and Shanghai Exchange)

मॉर्गन के अनुसार, Commodity Exchange, Inc. (COMEX) मुख्य रूप से डेरिवेटिव्स-ड्रिवन मार्केट है, जबकि शंघाई बाजार पर औद्योगिक उपभोक्ताओं का असर बढ़ता जा रहा है, जिन्हें उत्पादन के लिए वास्तविक धातु की जरूरत होती है। यही वजह है कि एक्सचेंज पर मौजूद चांदी का बड़ा हिस्सा निवेश या इंडस्ट्री के लिए फिजिकली उठाया जा रहा है।

CME Group के नए मार्जिन नियमों का असर (Impact of CME Group’s new margin rules)

हालिया बदलाव में CME Group ने मार्जिन आवश्यकताओं को नोटional वैल्यू के प्रतिशत से जोड़ा है। कीमतें बढ़ते ही लागत अपने-आप बढ़ जाती है। मॉर्गन कहते हैं, “ऊंचा मार्जिन सट्टा तेजी पर प्राकृतिक ब्रेक है—यह अत्यधिक लीवरेज वालों को बाहर करता है और बाजार को कैश-ओनली संरचना की ओर ले जाता है।”

एशिया से मजबूत डिमांड सिग्नल (Strong demand signals from Asia)

पूर्वी देशों से आ रही मांग इन्वेंट्री ड्रेन का बड़ा कारण बनी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत ने सिर्फ दो महीनों में ETF के जरिए करीब 4 करोड़ औंस चांदी जोड़ी है। इसके अलावा, Shanghai Futures Exchange 1 मार्च से कड़े हेजिंग नियम लागू करेगा, जिसके तहत पोजीशन लेने वालों को फिजिकल बिजनेस से जुड़ा होना साबित करना होगा।

क्या बुल मार्केट अंतिम चरण में?

मॉर्गन का मानना है कि ये सभी संकेत बताते हैं कि सोना-चांदी का बाजार अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है। ऐतिहासिक रूप से किसी भी बुल मार्केट की कुल तेजी का 90% हिस्सा उसके आखिरी 10% समय में आता है—और अगले एक-दो वर्षों में गोल्ड और सिल्वर नई ऊंचाई छू सकते हैं।

Platinum में छिपा वैल्यू अवसर

जहां चांदी चर्चा में है, वहीं मॉर्गन ने प्लैटिनम को लेकर भी संकेत दिया। चांदी की तुलना में प्लैटिनम फिलहाल 25 साल के निचले वैल्यू लेवल पर है, जो दीर्घकालिक निवेशकों के लिए अवसर हो सकता है।

निवेशकों के लिए क्या रणनीति? (Strategy for Investors)

विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक जोखिम लेने के बजाय फिजिकल होल्डिंग्स पर फोकस करना बेहतर है। यह व्यापक सिस्टमेटिक अस्थिरता के खिलाफ एक तरह का बीमा है—ताकि किसी बड़े झटके की स्थिति में पूंजी सुरक्षित रह सके।

Silver Market से जुड़े कुछ सवाल जवाब, FAQ’s

1. सिल्वर मार्केट में टाइटनिंग का क्या मतलब है?
सिल्वर मार्केट टाइटनिंग का अर्थ है कि बाजार में उपलब्ध भौतिक चांदी की मात्रा घट रही है, जबकि मांग मजबूत बनी हुई है। इससे सप्लाई पर दबाव बढ़ता है और कीमतों में अस्थिरता आ सकती है।

2. COMEX स्टॉक्स में कितनी गिरावट दर्ज की गई?
11 फरवरी 2026 को रजिस्टर्ड सिल्वर श्रेणी में 32.56 लाख औंस की कमी दर्ज हुई। कुल रजिस्टर्ड स्टॉक 10 करोड़ औंस से नीचे आ गया, जबकि एलीजिबल श्रेणी से भी लगभग 47 लाख औंस निकाले गए।

3. फिजिकल डिमांड पेपर प्राइसिंग पर कैसे हावी हो रही है?
विशेषज्ञों के अनुसार, जब निवेशक और औद्योगिक उपभोक्ता वास्तविक (फिजिकल) चांदी की डिलीवरी लेते हैं, तो यह डेरिवेटिव्स-आधारित पेपर ट्रेडिंग की तुलना में ज्यादा प्रभाव डालता है। इससे कीमत निर्धारण की प्रक्रिया में बदलाव आता है।

4. एशिया की मांग का बाजार पर क्या असर है?
भारत ने दो महीनों में ETF के जरिए करीब 4 करोड़ औंस चांदी जोड़ी है। साथ ही शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज नए हेजिंग नियम लागू कर रहा है, जिससे फिजिकल मांग और पारदर्शिता बढ़ेगी तथा इन्वेंट्री पर दबाव बना रहेगा।

5. निवेशकों के लिए मौजूदा रणनीति क्या हो सकती है?
विशेषज्ञों का सुझाव है कि अत्यधिक लीवरेज से बचें और फिजिकल होल्डिंग्स पर ध्यान दें। यह रणनीति बाजार की व्यापक अस्थिरता और संभावित प्रणालीगत जोखिमों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान कर सकती है।

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