Duty Drawback: भारत सरकार ने रत्न और ज्वेलरी एक्सपोर्टर्स (Gems and Jewellery Exporters) को बड़ी राहत देते हुए सोने और चांदी की ज्वैलरी पर ‘ड्यूटी ड्रॉबैक’ (Duty Drawback) की दरों में भारी बढ़ोतरी की है। वित्त मंत्रालय द्वारा अधिसूचित इस नए फैसले के तहत, निर्यातकों को अब उनके द्वारा निर्यात किए गए आभूषणों पर पहले के मुकाबले कहीं अधिक रिफंड मिलेगा। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वैश्विक बाजारों में सोने-चांदी की कीमतें आसमान छू रही हैं और इनपुट कॉस्ट बढ़ने से निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। इस वृद्धि का मुख्य उद्देश्य भारतीय निर्यातकों को वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धी बनाए रखना और उनके मुनाफे को सुरक्षित करना है।
क्या हैं नई दरें? (कितना बढ़ गया रिफंड)
सरकार ने ड्यूटी ड्रॉबैक की दरों की त्रैमासिक समीक्षा के बाद नई दरों को लागू किया है:
- सोने के आभूषण (Gold Jewellery): अब निर्यातकों को प्रति ग्राम शुद्ध सोने पर 773.17 रूपए का रिफंड मिलेगा, जो पहले 639.59 रूपए था।
- चांदी के आभूषण (Silver Jewellery): चांदी के आभूषणों और लेखों के लिए रिफंड दर को 9,089.33 रूपए से बढ़ाकर 14,990.66 रूपए प्रति किलोग्राम कर दिया गया है।
निर्यातकों को कैसे होगा फायदा?
‘ड्यूटी ड्रॉबैक’ एक ऐसी योजना है जिसके तहत निर्यात के लिए सामान बनाने में इस्तेमाल होने वाले आयातित कच्चे माल पर चुकाई गई कस्टम और एक्साइज ड्यूटी को सरकार वापस (रिफंड) कर देती है।
- लागत में कमी: बढ़ी हुई दरें निर्यातकों की बढ़ती इनपुट लागत को कम करने में मदद करेंगी।
- बेहतर कॉन्ट्रैक्ट: रिफंड ज्यादा मिलने से एक्सपोर्टर्स अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ बेहतर कीमतों पर बातचीत (Negotiate) कर पाएंगे।
- प्रतिस्पर्धा में बढ़त: वैश्विक बाजार में मंदी और बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय ज्वैलरी अब ज्यादा आकर्षक हो सकेगी।
मार्केट का हाल: कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब सराफा बाजार में भारी अस्थिरता देखी जा रही है।
- सोना (Gold): शुक्रवार को सोने की कीमतें 420 रूपए बढ़कर 1,51,479 रूपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गईं। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने भी घरेलू बाजार में सोने को सहारा दिया।
- चांदी (Silver): इसके विपरीत, मांग में कमी के चलते चांदी की कीमतों में 2,577 रूपए की भारी गिरावट देखी गई और यह 2.38 लाख रूपए प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई।
विशेषज्ञों की राय
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में सोने और चांदी की कीमतें केवल मांग और आपूर्ति पर नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया (West Asia) के घटनाक्रमों पर टिकी हैं। ईरान, इजराइल और स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज में अमेरिका की मौजूदगी ने अनिश्चितता का माहौल बना रखा है। जब तक इन तनावों का कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकलता, तब तक कीमतें खबरों के आधार पर घटती-बढ़ती रहेंगी।
सरकार का यह निर्णय न केवल ज्वैलरी उद्योग के लिए ‘बूस्टर डोज’ का काम करेगा, बल्कि विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने और ‘मेड इन इंडिया’ ज्वैलरी को दुनिया भर में लोकप्रिय बनाने में भी मदद करेगा।
Duty Drawback से जुड़े कुछ सवाल-जवाब, FAQ’s
1. ड्यूटी ड्रॉबैक क्या होता है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
ड्यूटी ड्रॉबैक एक सरकारी योजना है जिसमें निर्यात के लिए उपयोग किए गए आयातित कच्चे माल पर चुकाई गई कस्टम और एक्साइज ड्यूटी का रिफंड दिया जाता है। इससे निर्यातकों की लागत घटती है और वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनते हैं।
2. नई दरों में क्या बदलाव किया गया है?
सरकार ने सोने के आभूषण पर रिफंड बढ़ाकर 773.17 रूपए प्रति ग्राम और चांदी पर 14,990.66 रूपए प्रति किलोग्राम कर दिया है, जो पहले की तुलना में काफी अधिक है।
3. इस फैसले से ज्वैलरी निर्यातकों को क्या फायदा होगा?
बढ़े हुए रिफंड से उत्पादन लागत कम होगी, निर्यातक बेहतर कीमतों पर सौदे कर पाएंगे और वैश्विक बाजार में भारतीय ज्वैलरी की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
4. क्या इस फैसले का घरेलू बाजार पर भी असर पड़ेगा?
सीधे तौर पर यह निर्यात पर केंद्रित है, लेकिन निर्यात बढ़ने से घरेलू मांग और कीमतों पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है, खासकर सोने-चांदी के दामों में।
5. मौजूदा समय में सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव क्यों है?
वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, खासकर पश्चिम एशिया की स्थिति, डॉलर की चाल और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव के कारण सोने-चांदी की कीमतों में लगातार अस्थिरता बनी हुई है।
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