Friday, March 6, 2026
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Duty Drawback Rates Revised: जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर के लिए बड़ी खबर, सरकार ने बढ़ाईं दरें, एक्सपोर्टर्स को मिलेगा फायदा

Duty Drawback Rates Revised: भारत सरकार ने अध्याय 71 के तहत कुछ विशेष ज्वेलरी टैरिफ मदों पर ड्यूटी ड्रॉबैक दरों में संशोधन किया है। यह बदलाव वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) की अधिसूचना संख्या 21/2026–कस्टम्स (एन.टी.), दिनांक 16 फरवरी 2026 के माध्यम से लागू किया गया है। इस निर्णय से ज्वेलरी निर्यातकों की लागत वसूली बेहतर होने, मार्जिन में सुधार और वैश्विक बाजार में भारतीय आभूषणों की प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत होने की उम्मीद है।

Gem & Jewellery Export Promotion Council (GJEPC) ने भी अपने एक आर्टिकल में सरकार द्वारा किए गए इस संशोधन की पुष्टि की है। उन्होंने ने इस विषय पर Department of Commerce और NITI Aayog के अधिकारियों के साथ बैठकों में विस्तार से चर्चा भी की थी।

रिकॉर्ड हाई गोल्ड-सिल्वर प्राइस के बीच राहत

वर्तमान में सोना, चांदी और प्लेटिनम की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे निर्माताओं और निर्यातकों की कार्यशील पूंजी पर दबाव बढ़ा है। ऐसे समय में ड्रॉबैक दरों में वृद्धि उद्योग के लिए राहत का कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे निर्यात के बाद इनपुट पर चुकाए गए शुल्क का बड़ा हिस्सा वापस मिल सकेगा।

इन टैरिफ मदों में हुआ बदलाव (Changes in Tariff Items)

सरकार ने अधिसूचना संख्या 77/2023–कस्टम्स (एन.टी.) की अनुसूची में संशोधन करते हुए दरें बढ़ाई हैं:

  • टैरिफ मद 711301: 524.27 से बढ़ाकर 639.59
  • टैरिफ मद 711302 और 711401: 6,317.22 से बढ़ाकर 9,089.33

यह संशोधन जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट सेक्टर की बढ़ती लागत को ध्यान में रखकर किया गया है।

GJEPC, वाणिज्य विभाग और NITI Aayog की भूमिका (Role of GJEPC, Department of Commerce and NITI Aayog)

इस मुद्दे को लेकर GJEPC ने वाणिज्य विभाग और NITI Aayog के अधिकारियों के साथ बैठकों में चर्चा की थी। परिषद ने निर्यातकों की बढ़ती इनपुट लागत और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए ड्रॉबैक दरों में संशोधन की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा मिल सके।

Duty Drawback Scheme क्या होता है? (What is Duty Drawback Scheme?)

Duty Drawback Scheme एक सरकारी योजना है जिसके तहत निर्यात (Export) किए गए माल पर इस्तेमाल हुए कच्चे माल या इनपुट पर चुकाए गए सीमा शुल्क (Customs Duty), एक्साइज ड्यूटी या अन्य करों का कुछ हिस्सा सरकार द्वारा वापस (Refund) किया जाता है।

जब कोई कंपनी विदेश में सामान बेचने के लिए उत्पाद बनाती है, तो उसे कच्चे माल पर टैक्स देना पड़ता है। निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार उस टैक्स का एक हिस्सा वापस कर देती है।
स्कीम का उद्देश्य (Objectives of Duty Drawback Scheme)
  • निर्यात को बढ़ावा देना
  • भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाना
  • निर्यातकों की लागत कम करना
  • कैश फ्लो में सुधार करना

MSME सेक्टर को मिलेगा सीधा लाभ (Benefit to MSME Sector)

उच्च ड्रॉबैक दरों से निर्यातकों के कैश फ्लो में सुधार की संभावना है। निर्यात प्राप्ति के बाद इनपुट पर अदा किए गए शुल्क का बड़ा हिस्सा लौटने से विशेष रूप से MSME ज्वेलरी यूनिट्स को फायदा होगा, जो सीमित पूंजी के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में काम करती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारतीय ज्वेलरी निर्यात उद्योग को वैश्विक स्तर पर स्थिरता और मजबूती प्रदान करेगा और ऊंची धातु कीमतों के दौर में वित्तीय सहारा देगा।

Duty Drawback Rate से जुड़े कुछ जरुरी सवाल-जवाब, FAQ’s

1. सरकार ने ड्यूटी ड्रॉबैक दरों में क्या बदलाव किया है?
भारत सरकार ने अध्याय 71 के तहत कुछ ज्वेलरी टैरिफ मदों पर ड्रॉबैक दरों को बढ़ाया है। टैरिफ मद 711301 की दर 524.27 से बढ़ाकर 639.59 कर दी गई है, जबकि 711302 और 711401 की दर 6,317.22 से बढ़ाकर 9,089.33 कर दी गई है।

2. यह संशोधन किस अधिसूचना के तहत लागू हुआ है?
यह बदलाव वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या 21/2026–कस्टम्स (एन.टी.), दिनांक 16 फरवरी 2026 के माध्यम से लागू किया गया है। यह संशोधन अधिसूचना 77/2023–कस्टम्स (एन.टी.) की अनुसूची में बदलाव करता है।

3. ज्वेलरी निर्यातकों को इससे क्या लाभ होगा?
ड्रॉबैक दरों में वृद्धि से निर्यात के बाद इनपुट पर चुकाए गए शुल्क का अधिक हिस्सा वापस मिलेगा। इससे निर्यातकों की लागत वसूली बेहतर होगी, मार्जिन सुधरेंगे और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी।

4. रिकॉर्ड हाई गोल्ड-सिल्वर प्राइस के बीच यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?
सोना, चांदी और प्लेटिनम की ऊंची कीमतों के कारण निर्माताओं की कार्यशील पूंजी पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में ड्रॉबैक दरों में वृद्धि उद्योग के लिए वित्तीय राहत का काम करेगी और नकदी प्रवाह को स्थिर बनाएगी।

5. MSME ज्वेलरी यूनिट्स को इससे कैसे फायदा होगा?
MSME सेक्टर सीमित पूंजी के साथ काम करता है। अधिक ड्रॉबैक मिलने से इन इकाइयों का कैश फ्लो सुधरेगा, कार्यशील पूंजी का दबाव कम होगा और वे वैश्विक बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगी।

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