Bank of America Report: वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में आ रहे उतार-चढ़ाव के बीच दिग्गज वित्तीय संस्थान बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) ने अपनी ताजा रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट का मुख्य सार यह है कि सोने की तेजी में फिलहाल एक पॉज (Break) आया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सोने का अच्छा समय खत्म हो गया है। आइए जानते हैं कि बैंक ऑफ अमेरिका की इस रिपोर्ट में सोने के भविष्य, फेडरल रिजर्व के फैसलों और ETF के रुझानों को लेकर क्या बड़े खुलासे किए गए हैं।
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क्यों रुकी सोने की रफ्तार?
पहले बाजार में यह धारणा थी कि महंगाई ऊंची रहेगी और फेडरल रिजर्व (Fed) ब्याज दर में कटौती करेगा। इसे “Inflationary Cuts” का माहौल कहते हैं, जो सोने के लिए सबसे बेहतरीन मौसम होता है। लेकिन अब यह मौसम बदल गया है।
मौद्रिक नीति (Monetary Policy) के कड़े होने की आशंका, मजबूत डॉलर और ETF से पैसे निकलने के कारण सोने के दाम रुक गए हैं।
6,000 डॉलर का लक्ष्य फिलहाल मुश्किल
BofA का कहना है कि सोने के लिए उनका पहले का 6,000 डॉलर प्रति औंस का टारगेट “फिलहाल” पूरा होना मुश्किल लग रहा है, लेकिन लंबी अवधि (Long-term) में सोना अभी भी मजबूत है। अमेरिका का बढ़ता हुआ कर्ज (Deficits) और सरकारी बॉन्ड (Treasury) में विदेशी निवेशकों की घटती दिलचस्पी सोने को लंबी अवधि में सहारा देती रहेगी।
फेडरल रिजर्व (Fed) बन गया है तात्कालिक समस्या
सोने के दाम गिरने या रुकने की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी केंद्रीय बैंक (Fed) का रुख है।
खेल कैसे बदला: सोना तब भागना शुरू हुआ था जब 2023 में ब्याज दर अपने उच्चतम स्तर पर थीं और फेड ने महंगाई के बावजूद दर घटाने के संकेत दिए थे। सोने को तब मजा आता है जब ब्याज दर घटती हैं और महंगाई बढ़ती है।
जून की बैठक का असर: जून की FOMC बैठक के बाद माहौल बदल गया। फेड के 9 अधिकारियों ने इस साल ब्याज दर बढ़ाने (Hikes) के संकेत दिए। फेड के चेयरमैन ने सख्त (Hawkish) रुख अपनाते हुए साफ कर दिया कि वे महंगाई को काबू में करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अब फेड महंगाई को नजरअंदाज करने के मूड में नहीं है।
BofA का एक महत्वपूर्ण गणित
रिपोर्ट के मुताबिक, सोना सिर्फ महंगाई देखकर नहीं भागता, बल्कि यह देखता है कि फेड उस महंगाई से कैसे निपट रहा है:
- महंगाई + ब्याज दर में कटौती = सोने के लिए बंपर तेजी: ऐसी स्थिति में 2001 से अब तक सोने ने औसतन 21.8% का सालाना रिटर्न दिया है।
- महंगाई + ब्याज दर में बढ़ोतरी = सोने के लिए कम तेजी: ऐसी स्थिति में सोने का औसत रिटर्न घटकर 10.8% रह जाता है।
सख्त फेड (Hawkish Fed) के रहते हुए भी सोना बढ़ सकता है, लेकिन अब उसे ऊपर जाने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत करनी होगी।
ETF (Exchange Traded Funds) हैं असली संकेतक (The Tell)
BofA की रिपोर्ट मानती है कि अगर आपको निवेशकों का मूड समझना है, तो Gold ETFs को देखिए। पश्चिमी देशों के बड़े संस्थान और निवेशक सोना खरीदने के लिए ETF का इस्तेमाल करते हैं।
- लगातार हो रही है बिकवाली: रिपोर्ट के अनुसार, निवेशकों ने लगातार अपनी पोजीशन बेची है (Liquidation)।
- होल्डिंग में गिरावट: पिछले महीने में फिजिकल गोल्ड समर्थित ETF एसेट्स में 1.6% की गिरावट आई है और कुल होल्डिंग लगभग 97.1 मिलियन औंस रह गई है।
- पश्चिमी निवेशक अभी दूर हैं: इसका मतलब यह है कि पश्चिमी देशों के बड़े निवेशकों ने अभी तक सोने में दोबारा पैसा लगाना शुरू नहीं किया है।
किन दो स्तंभों पर टिकी है सोने की तेजी?
BofA की पहले की तेजी (Bullish Call) दो स्तंभों पर टिकी थी: मैक्रो तनाव (Macro Stress) और निवेशक का पैसा (Investor Allocation)।
वर्तमान में दुनिया में आर्थिक तनाव तो बना हुआ है, लेकिन निवेशकों ने सोने में नया पैसा डालना फिलहाल रोक दिया है। इसीलिए सोना अभी थमा हुआ है, पर जैसे ही परिस्थितियां बदलेंगी, यह फिर से उड़ान भर सकता है।
सोने, चांदी के भाव से जुड़े सवाल जवाब, Gold Silver Price FAQ
1. बैंक ऑफ अमेरिका के अनुसार फिलहाल सोने की तेजी क्यों रुकी हुई है?
BofA के मुताबिक फेडरल रिजर्व के सख्त रुख, मजबूत अमेरिकी डॉलर और गोल्ड ETF से लगातार निवेश निकासी के कारण सोने की कीमतों में फिलहाल ठहराव देखने को मिल रहा है।
2. क्या बैंक ऑफ अमेरिका ने सोने के 6,000 डॉलर प्रति औंस के लक्ष्य को वापस ले लिया है?
नहीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 6,000 डॉलर प्रति औंस का लक्ष्य निकट भविष्य में हासिल करना मुश्किल दिख रहा है, लेकिन लंबी अवधि में अमेरिकी कर्ज और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के कारण सोने का आउटलुक अभी भी मजबूत बना हुआ है।
3. फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति का सोने की कीमतों पर क्या असर पड़ता है?
जब फेड महंगाई के बीच ब्याज दरों में कटौती करता है तो सोने को मजबूत समर्थन मिलता है। वहीं, यदि फेड महंगाई नियंत्रित करने के लिए सख्त रुख अपनाकर दरें ऊंची रखता है या बढ़ाता है, तो सोने की तेजी सीमित हो सकती है।
4. गोल्ड ETF में लगातार हो रही बिकवाली निवेशकों को क्या संकेत देती है?
BofA के अनुसार गोल्ड ETF से निकासी यह दर्शाती है कि पश्चिमी संस्थागत निवेशकों ने फिलहाल सोने में नई खरीदारी शुरू नहीं की है। जब ETF में दोबारा निवेश बढ़ेगा, तब सोने की कीमतों को नई मजबूती मिल सकती है।
5. बैंक ऑफ अमेरिका के मुताबिक लंबी अवधि में सोने को किन प्रमुख कारकों से समर्थन मिलेगा?
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका का बढ़ता राजकोषीय घाटा, सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेशकों की घटती रुचि, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और भविष्य में निवेशकों की वापसी ऐसे प्रमुख कारक हैं, जो लंबी अवधि में सोने की कीमतों को समर्थन दे सकते हैं।
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डिस्क्लेमर: ये न्यूज सिर्फ जानकारी के लिए बनाई गई है, निवेश या ट्रेडिंग की सलाह नहीं है। स्टोरी में दी गई राय एक्सपर्ट और ब्रोकरेज हाउस की है। गोल्ड प्राइस टुडे से जुड़े लोग निजी तौर पर सोने, चांदी की ट्रेडिंग नहीं करते हैं। हमारी सोने, चांदी में कोई पोजीशन नहीं है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें। सोने चांदी में निवेश जोखिम का काम है अपने विवेक का इस्तेमाल करें। आपको होने वाले किसी भी नुकसान की हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है।



