Tuesday, June 23, 2026
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Gold Price Forecast: गोल्ड के टारगेट पर बैंक ऑफ अमेरिका भी पीछे हटा, 6,000 डॉलर का लक्ष्य फिलहाल मुश्किल

Gold Price Forecast: वैश्विक सर्राफा बाजार और सोने के निवेशकों के लिए एक बड़ी खबर आ रही है। पिछले साल जब सोने में रिकॉर्ड तेजी आनी शुरू हुई थी, तब बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) बाजार में सबसे ज्यादा तेजी का अनुमान लगाने वाले बैंकों में से एक था। जनवरी में बैंक ने दावा किया था कि सोने की कीमत 6,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। लेकिन पिछले कुछ महीनों में सोने की कीमतों में आई भारी गिरावट के कारण अब माइकल विडमर (Michael Widmer) के नेतृत्व वाली रिसर्च टीम को अपना शॉर्ट-टर्म नजरिया बदलना पड़ा है और बैंक ऑफ अमेरिका भी अपने इस भारी-भरकम टारगेट से पीछे हट गया है।

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6,000 डॉलर का टारगेट फिलहाल मुश्किल

बैंक ऑफ अमेरिका ने अपनी ताजा रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा है:

“फिलहाल हमारा 6,000 डॉलर का टारगेट पूरा होना मुश्किल लग रहा है। लेकिन लंबी अवधि (long-term) में सोने में तेजी के लिए ईंधन (दम) अभी बाकी है।”

लंबी अवधि में तेजी की मुख्य वजहें:

  • अमेरिका का बढ़ता हुआ राजकोषीय घाटा (high deficits)।
  • वित्तीय सुधारों की कमी।
  • सरकार की फंडिंग जरूरतें, जो आगे चलकर सोने की कीमतों को सहारा देंगी।

Near-Term में सोने के लिए सबसे बड़ा रोड़ा

माइकल विडमर ने समझाया कि अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर बदलते अनुमान अल्पावधि (Near Term) में सोने की राह में सबसे बड़ी रुकावट हैं।

  • ब्याज दरें घटने के बजाय बढ़ेंगी: साल की शुरुआत में बाजार को उम्मीद थी कि फेडरल रिजर्व इस साल ब्याज दरों में कटौती करेगा। लेकिन ईरान में हुए युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट (global energy crisis) पैदा हो गया, जिससे महंगाई का दबाव अचानक बहुत बढ़ गया।
  • दिसंबर 2026 तक दरें बढ़ने का अनुमान: अब बाजार को उम्मीद है कि दरें घटने के बजाय बढ़ सकती हैं। CME FedWatch Tool के अनुसार, सितंबर तक ब्याज दरें बढ़ने की 70% से अधिक संभावना है।
  • सोने पर असर: दिसंबर 2026 तक ब्याज दरें बढ़ने की आशंका के कारण ही सोने की कीमतों में गिरावट आई है। विडमर के अनुसार, “नीति में इस बदलाव ने सोने की बढ़त की संभावना को लगभग 50% तक कम कर दिया है।”

युद्ध थमा तो भी कम नहीं होगा महंगाई का दबाव

बैंक का मानना है कि अगर युद्ध थम भी जाता है, तो भी महंगाई का दबाव आसानी से कम नहीं होने वाला है, जिसके पीछे ये प्रमुख कारण हैं:

  1. वैश्विक बिखराव (Geopolitical Fragmentation): सप्लाई चेन पर दबाव और उत्पादकों की लागत (producer prices) बढ़ने से महंगाई का आउटलुक चिंताजनक बना हुआ है।
  2. ट्रंप टैरिफ का झटका: पहले गुड्स (सामान) की महंगाई कम होने से फेड को मदद मिलती थी, लेकिन कोविड के बाद कोर गुड्स की महंगाई बढ़ी और रही-सही कसर ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ (आयात शुल्क) ने पूरी कर दी, जिससे महंगाई को और बढ़ावा मिला।

लंबी अवधि (Long-Term) में सोना क्यों होगा मजबूत?

भले ही बढ़ती महंगाई के कारण फेडरल रिजर्व सख्त रुख (hawkish stance) अपना रहा है, लेकिन बैंक ऑफ अमेरिका का मानना है कि कुछ अन्य बड़े कारण सोने को लंबी अवधि में मजबूत करेंगे:

  • अमेरिकी आर्थिक नीतियां: अमेरिका का राजकोषीय घाटा लगातार जीडीपी (GDP) के 6% के आसपास बना हुआ है।
  • डॉलर से दूरी: अमेरिकी ट्रेजरी (सरकारी बॉन्ड) में विदेशी निवेश घट रहा है। केंद्रीय बैंकों के एक सर्वे के अनुसार, 74% उत्तरदाताओं का मानना है कि अगले 5 वर्षों में वैश्विक रिजर्व में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी काफी कम हो जाएगी। लोग अब डॉलर के विकल्प के रूप में सोने को चुन रहे हैं।
  • रिटेल निवेशकों से मांग की उम्मीद: विश्लेषकों का कहना है कि जब बाजार में फिर से ब्याज दरें घटने की उम्मीद जगेगी, तब निवेशकों की मांग सोने को बहुत ऊपर ले जाएगी। अभी निवेश पोर्टफोलियो को ट्रेडिशनल 60:40 (शेयर और बॉन्ड) से बदलकर 60:20:20 (जिसमें 20% हिस्सा गोल्ड या अन्य विकल्पों का हो) करने की काफी गुंजाइश है।

संक्षेप में कहें तो, शॉर्ट-टर्म (कम अवधि) में अमेरिकी फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ने की आशंका और सख्त नीति के कारण सोने की कीमतों में गिरावट या दबाव देखा जा सकता है, जिससे 6,000 डॉलर का लक्ष्य फिलहाल दूर हो गया है। लेकिन लॉन्ग टर्म (लंबी अवधि) में अमेरिका के बड़े आर्थिक संकटों (जैसे कर्ज, घाटा और डॉलर की घटती साख) के कारण सोने में एक बार फिर बड़ी तेजी आने की पूरी संभावना है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल, FAQ’s

1. बैंक ऑफ अमेरिका ने अपने 6,000 डॉलर प्रति औंस के गोल्ड टारगेट पर क्या कहा है?
बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में स्वीकार किया है कि मौजूदा परिस्थितियों में सोने का 6,000 डॉलर प्रति औंस का लक्ष्य निकट अवधि में हासिल करना कठिन दिखाई देता है। हालांकि, बैंक का मानना है कि लंबी अवधि में सोने की तेजी की संभावनाएं अभी भी मजबूत बनी हुई हैं।

2. बैंक ऑफ अमेरिका ने सोने के शॉर्ट-टर्म आउटलुक को क्यों बदला है?
बैंक के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम हो गई है। इसके बजाय बाजार अब दरों में बढ़ोतरी की संभावना देख रहा है, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ा है और बैंक को अपना अल्पकालिक दृष्टिकोण बदलना पड़ा है।

3. फेड की ब्याज दरों का सोने की कीमतों पर क्या असर पड़ता है?
आमतौर पर उच्च ब्याज दरें डॉलर और बॉन्ड को अधिक आकर्षक बनाती हैं, जिससे सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों की मांग कमजोर हो सकती है। यही कारण है कि दर वृद्धि की आशंका अक्सर सोने की कीमतों पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।

4. बैंक ऑफ अमेरिका के अनुसार लॉन्ग टर्म में सोना मजबूत क्यों रह सकता है?
बैंक का मानना है कि अमेरिका का बढ़ता राजकोषीय घाटा, सरकारी कर्ज, वित्तीय सुधारों की कमी और वैश्विक रिजर्व में डॉलर की संभावित घटती हिस्सेदारी भविष्य में सोने की मांग को समर्थन दे सकती है और कीमतों को ऊंचा ले जा सकती है।

5. निवेशकों के लिए बैंक ऑफ अमेरिका का मुख्य संदेश क्या है?
बैंक का कहना है कि निकट अवधि में फेड की सख्त मौद्रिक नीति और ब्याज दरों की अनिश्चितता के कारण सोने में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। लेकिन लंबी अवधि में आर्थिक जोखिमों और निवेशकों की बढ़ती मांग के चलते सोना एक मजबूत निवेश विकल्प बना रह सकता है।

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डिस्क्लेमर: ये न्यूज सिर्फ जानकारी के लिए बनाई गई है, निवेश या ट्रेडिंग की सलाह नहीं है। स्टोरी में दी गई राय एक्सपर्ट और ब्रोकरेज हाउस की है। गोल्ड प्राइस टुडे से जुड़े लोग निजी तौर पर सोने, चांदी की ट्रेडिंग नहीं करते हैं। हमारी सोने, चांदी में कोई पोजीशन नहीं है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें। सोने चांदी में निवेश जोखिम का काम है अपने विवेक का इस्तेमाल करें। आपको होने वाले किसी भी नुकसान की हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है।

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