ANZ: वैश्विक बाजारों में मची उथल-पुथल के बीच सोने और चांदी की कीमतों को लेकर बड़ी खबर आ रही है। दिग्गज बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विस ग्रुप ANZ ने साल 2026 के लिए सोने के भाव का टारगेट घटा दिया है। उन्होंने टारगेट को घटाकर अब 5,600 डॉलर कर दिया है, वहीं मिड-2027 तक सोने के 6,000 डॉलर के स्तर को छूने की बात कही है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां, मिडल ईस्ट (मध्य पूर्व) का भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें इस बड़े फैसले के पीछे की मुख्य वजहें हैं। ANZ की कमोडिटी स्ट्रेटजिस्ट सोनी कुमारी ने बताया कि किस तरह शॉर्ट-टर्म रिस्क के चलते सोने-चांदी के दामों में यह बड़ा डायरेक्शनल शिफ्ट देखने को मिल रहा है।
ANZ ने सोने का टारगेट क्यों घटाया?
ANZ की कमोडिटी स्ट्रेटजिस्ट सोनी कुमारी के अनुसार, साल 2026 के लिए सोने के टारगेट को घटाकर 5,600 डॉलर तय करने के पीछे 4 बड़े शॉर्ट-टर्म फैक्टर्स (Headwinds) काम कर रहे हैं:
- एनर्जी मार्केट और क्रूड ऑयल में तेजी: मिडल ईस्ट में लगातार जारी तनाव के कारण ऑयल सप्लाई सुचारू रूप से नहीं हो पा रही है। कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतों से वैश्विक स्तर पर महंगाई (Inflation) बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
- फेडरल रिजर्व का ‘रेट कट’ टलना: साल की शुरुआत में बाजार को उम्मीद थी कि अमेरिकी फेड रिजर्व इस साल 2-3 बार ब्याज दरों में कटौती करेगा। पहले सितंबर में रेट कट की उम्मीद थी, लेकिन महंगाई के रिस्क को देखते हुए अब इसके दिसंबर 2026 तक टलने की संभावना है। ब्याज दरें ऊंची रहने से सोने पर दबाव बढ़ता है।
- मजबूत अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 4.6% के ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। इसके साथ ही डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ है। डॉलर मजबूत होने से गैर-अमेरिकी निवेशकों (जैसे भारत और चीन) के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे डिमांड प्रभावित होती है।
- अमेरिकी अर्थव्यवस्था की स्थिति: अमेरिका में बेरोजगारी दर (Unemployment Rate) फिलहाल स्थिर है और जीडीपी के आंकड़े थोड़े सुस्त जरूर हुए हैं, लेकिन कोई अलार्मिंग या पैनिक जैसी स्थिति नहीं है। इसलिए फेड के पास स्थिति की समीक्षा करने के लिए पर्याप्त समय है।
लॉन्ग-टर्म में तेजी का ट्रेंड अभी भी बरकरार
भले ही शॉर्ट-टर्म में सोने की कीमतों पर दबाव दिख रहा हो, लेकिन ANZ का मानना है कि मीडियम और लॉन्ग-टर्म (मध्यम और लंबी अवधि) में सोने के बुनियादी ड्राइवर (Structural Drivers) बेहद मजबूत हैं। मिड-2027 तक सोना 6,000 डॉलर के स्तर को छू सकता है। इसके पीछे के मुख्य कारण हैं:
- जियोपॉलिटिकल अनसर्टेनिटी: दुनिया के दो बड़े क्षेत्रों (रूस-यूक्रेन और मिडल ईस्ट) में युद्ध की स्थिति बनी हुई है, जिससे निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।
- डीडॉलरलाइजेशन (Dedollarization): वैश्विक स्तर पर डॉलर पर निर्भरता कम करने की होड़ मची है। सोना एक नॉन-सोवरन और न्यूट्रल एसेट है, जो किसी एक देश से लिंक नहीं है, इसलिए रिटेल और इंस्टीट्यूशनल निवेशक इसमें पोर्टफोलियो डायवर्सिफाई कर रहे हैं।
सेंट्रल बैंकों की आक्रामक खरीदारी से मिल रहा है सपोर्ट
इंटरव्यू में इस बात पर भी जोर दिया गया कि जब साल 2023 से 2025 के बीच फेड रेट बढ़ा रहा था, तब भी सोने में ऐतिहासिक रैली देखी गई। इसका सबसे बड़ा कारण सेंट्रल बैंकों की रिकॉर्ड बाइंग थी।
- नॉन-रिपोर्टेड और नई बाइंग: दुनिया भर के कई ऐसे नए सेंट्रल बैंक भी अब सोना खरीद रहे हैं जिन्होंने पहले कभी निवेश नहीं किया था। चीन ने अप्रैल में लगातार खरीदारी की है।
- रणनीतिक निवेश: हालांकि रशिया और टर्की ने लिक्विडिटी के लिए कुछ टैक्टिकल सेलिंग की है, लेकिन पोलैंड जैसे देश 150 टन अतिरिक्त सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं। ANZ के अनुसार, इस साल भी सेंट्रल बैंकों की बाइंग 850 से 950 टन के मजबूत दायरे में बनी रहेगी, जो कीमतों के लिए ‘कुशन’ का काम करेगी।
चांदी (Silver) को लेकर क्या है ANZ का नजरिया?
चांदी की कीमतों पर बात करते हुए सोनी कुमारी ने बताया कि पिछले साल यूएस इंपोर्ट टैरिफ और एलबीएमए (LBMA) स्पॉट मार्केट में टाइटनेस की वजह से चांदी में तेज रैली आई थी, जो अब नॉर्मलाइज हो चुकी है।
- इंडस्ट्रियल मेटल की तरह बर्ताव: वर्तमान में गोल्ड-सिल्वर रेशियो (Gold-Silver Ratio) 95-96 के आसपास है, जो दिखाता है कि चांदी फिलहाल प्रीशियस मेटल से ज्यादा एक इंडस्ट्रियल मेटल की तरह व्यवहार कर रही है। सोलर इंडस्ट्री में हायर प्राइसेस के कारण ‘थ्रिफ्टिंग’ (चांदी का विकल्प ढूंढना) देखी जा रही है।
- प्राइस टारगेट: हालांकि चांदी का मार्केट डेफिसिट (सप्लाई में कमी) में है, इसलिए बहुत बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है। साल 2026 के अंत तक चांदी के 85 डॉलर से 86 डॉलर के दायरे में जाने की उम्मीद है, जबकि शॉर्ट-टर्म में यह 70 डॉलर-75 डॉलर के बीच एंकर रह सकती है।
अक्सर पूछे, जाने वाले सवाल, FAQ’s
1. ANZ ने 2026 के लिए सोने का टारगेट कितना तय किया है?
ANZ ने 2026 के लिए सोने का प्राइस टारगेट घटाकर 5,600 डॉलर प्रति औंस कर दिया है। बैंक का मानना है कि निकट अवधि में कुछ आर्थिक और बाजार संबंधी चुनौतियां सोने की कीमतों पर दबाव डाल सकती हैं।
2. ANZ ने सोने का लक्ष्य क्यों घटाया?
ANZ के अनुसार बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती में देरी, मजबूत अमेरिकी डॉलर और ऊंची बॉन्ड यील्ड जैसे कारक सोने की कीमतों के लिए अल्पकालिक बाधाएं बन रहे हैं।
3. क्या ANZ अभी भी सोने को लेकर सकारात्मक है?
हां, ANZ का मानना है कि लंबी अवधि में सोने की तेजी बरकरार रहेगी। बैंक ने अनुमान लगाया है कि मिड-2027 तक सोना 6,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंच सकता है।
4. सोने की कीमतों को लंबी अवधि में कौन से कारक समर्थन दे सकते हैं?
भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक स्तर पर डॉलर पर निर्भरता कम करने की प्रवृत्ति (Dedollarization) और दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार की जा रही सोने की खरीदारी सोने की कीमतों को समर्थन दे सकती है।
5. ANZ का चांदी (Silver) को लेकर क्या अनुमान है?
ANZ का मानना है कि चांदी का बाजार अभी भी सप्लाई डेफिसिट में है। बैंक के अनुसार 2026 के अंत तक चांदी 85-86 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है, जबकि निकट अवधि में यह 70-75 डॉलर के दायरे में रह सकती है।
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डिस्क्लेमर: ये न्यूज सिर्फ जानकारी के लिए बनाई गई है, निवेश या ट्रेडिंग की सलाह नहीं है। स्टोरी में दी गई राय एक्सपर्ट और ब्रोकरेज हाउस की है। गोल्ड प्राइस टुडे से जुड़े लोग निजी तौर पर सोने, चांदी की ट्रेडिंग नहीं करते हैं। हमारी सोने, चांदी में कोई पोजीशन नहीं है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें। सोने चांदी में निवेश जोखिम का काम है अपने विवेक का इस्तेमाल करें। आपको होने वाले किसी भी नुकसान की हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है।



