World Gold Council (WGC) ने भारत सरकार से सोने को ‘स्ट्रेटेजिक मिनरल (Strategic Mineral)’ का दर्जा देने की मांग की है। उनका मानना है कि ऐसा करने से देश में सोने के खनन को बढ़ावा मिलेगा, आयात पर निर्भरता कम होगी और भारत के आत्मनिर्भर बनने के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।
Single Window प्रणाली से आसान होगी मंजूरी
WGC इंडिया के रीजनल सीईओ सचिन जैन के अनुसार, यदि सोने को स्ट्रेटेजिक मिनरल घोषित किया जाता है, तो खनन कंपनियों को विभिन्न राज्यों से अलग-अलग अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके बजाय, केंद्र सरकार के माध्यम से सिंगल विंडो क्लियरेंस व्यवस्था लागू हो सकती है, जिससे लाइसेंस और मंजूरी की प्रक्रिया तेज और सरल होगी।
उनका कहना है कि इस प्रस्ताव पर खनन मंत्रालय (Ministry of Mines) के साथ विस्तार से चर्चा की जा चुकी है और इससे देश में निवेश और खनन गतिविधियों को नई गति मिल सकती है।
घरेलू खनन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता घटाने का लक्ष्य
WGC का मानना है कि भारत हर साल बड़ी मात्रा में सोने का आयात करता है, जिससे चालू खाते (Current Account Deficit) पर दबाव बढ़ता है। यदि घरेलू सोना उत्पादन बढ़ाया जाए और इसे रणनीतिक खनिज का दर्जा मिले, तो आयात की जरूरत कम होगी और देश की आर्थिक मजबूती बढ़ेगी।
अपनी रिपोर्ट ‘स्वर्णिम उड़ान 2047 (Swarnim Udaan 2047)’ में WGC ने सुझाव दिया है कि वर्ष 2047 तक भारत की कुल वार्षिक सोने की मांग का 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा घरेलू खनन से पूरा किया जाना चाहिए।
31,000 टन घरेलू सोने का बेहतर उपयोग करने की जरूरत
WGC के अनुसार भारतीय परिवारों के पास लगभग 31,000 टन सोना मौजूद है, जिसमें करीब 20,000 टन आभूषण और लगभग 6,000 टन गोल्ड बार एवं सिक्के शामिल हैं इस सोने का अनुमानित मूल्य करीब 314.9 लाख करोड़ रुपए है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यदि इस निष्क्रिय (Idle) सोने का सिर्फ 1 प्रतिशत भी हर वर्ष गोल्ड मोनेटाइजेशन के माध्यम से आर्थिक प्रणाली में लाया जाए, तो लगभग 3.1 लाख करोड़ रुपए के बराबर सोने के आयात की आवश्यकता कम की जा सकती है। इससे घरेलू अर्थव्यवस्था को नई पूंजी मिलेगी और विदेशी आयात पर निर्भरता घटेगी।
केंद्रीय बैंकों की खरीद बनी रह सकती है मजबूत
सचिन जैन का मानना है कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, बढ़ते सरकारी कर्ज और अमेरिकी डॉलर पर भरोसे को लेकर बनी चिंताओं के बीच दुनिया भर के केंद्रीय बैंक आने वाले समय में भी सोने की खरीद जारी रख सकते हैं। ऐसे माहौल में सोना दीर्घकालिक रणनीतिक संपत्ति (Strategic Asset) के रूप में अपनी अहमियत बनाए रखेगा।
डिजिटल गोल्ड और टोकनाइजेशन पर भी WGC का जोर
WGC ने गोल्ड मोनेटाइजेशन प्रक्रिया को अधिक सरल और डिजिटल बनाने की जरूरत पर भी बल दिया है। खासकर गोल्ड बार और सिक्कों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर उन्हें अधिक पारदर्शी, प्रमाणिक और आसानी से खरीदा-बेचा जा सकने वाला बनाया जा सकता है।
सचिन जैन ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी और गोल्ड की भूमिका अलग-अलग रहेगी, लेकिन भविष्य में गोल्ड टोकनाइजेशन जैसी तकनीक निवेशकों के लिए सोने को अधिक सुलभ और उपयोगी बना सकती है।
सोने, चांदी के भाव से जुड़े सवाल-जवाब, FAQ’s
1. WGC ने सोने को रणनीतिक खनिज घोषित करने की मांग क्यों की है?
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का मानना है कि यदि सोने को रणनीतिक खनिज का दर्जा मिलता है, तो खनन परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया आसान होगी, घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और भारत की सोने के आयात पर निर्भरता कम हो सकेगी।
2. रणनीतिक खनिज का दर्जा मिलने से देश को क्या फायदा होगा?
इससे सिंगल विंडो क्लियरेंस व्यवस्था लागू होने की संभावना बढ़ेगी, निवेश आकर्षित होगा, खनन गतिविधियों में तेजी आएगी और भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा सकेगा। साथ ही चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
3. WGC की ‘स्वर्णिम उड़ान 2047’ रिपोर्ट का मुख्य लक्ष्य क्या है?
रिपोर्ट का उद्देश्य वर्ष 2047 तक भारत की कुल वार्षिक सोने की मांग का 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा घरेलू खनन से पूरा करना और गोल्ड मोनेटाइजेशन के जरिए देश में मौजूद निष्क्रिय सोने को आर्थिक गतिविधियों में शामिल करना है।
4. भारत के पास कितना घरेलू सोना है और इसका महत्व क्या है?
WGC के अनुमान के अनुसार भारतीय परिवारों के पास लगभग 31,000 टन सोना है, जिसकी अनुमानित कीमत 314.9 लाख करोड़ रुपए है। इस सोने के एक छोटे हिस्से का भी उत्पादक उपयोग किया जाए तो आयात में बड़ी कमी लाई जा सकती है और अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त पूंजी मिल सकती है।
5. गोल्ड टोकनाइजेशन और गोल्ड मोनेटाइजेशन से क्या लाभ हो सकता है?
गोल्ड टोकनाइजेशन से सोने की खरीद-बिक्री अधिक सुरक्षित, डिजिटल और पारदर्शी बन सकती है। वहीं, गोल्ड मोनेटाइजेशन से घरों में पड़ा निष्क्रिय सोना आर्थिक प्रणाली में शामिल होगा, जिससे आयात की जरूरत कम होगी और देश की वित्तीय व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
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