Japan Bond Market: करीब दो दशकों तक बेहद कम रिटर्न देने वाला जापान का सरकारी बॉन्ड (JGB) बाजार अब एक बार फिर वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता दिख रहा है। बैंक ऑफ जापान (BOJ) की मौद्रिक नीति में बदलाव और बॉन्ड यील्ड में आई तेज बढ़ोतरी ने इस बाजार को नई पहचान दी है।
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10 साल के जापानी बॉन्ड की यील्ड 1996 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर
जापान के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड हाल ही में 2.90% तक पहुंच गई, जो 1996 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। फिलहाल यह लगभग 2.78% के आसपास कारोबार कर रही है। वहीं 20 वर्षीय बॉन्ड की यील्ड भी करीब 3.90% तक पहुंच गई, जो लंबे समय बाद मजबूत रिटर्न का संकेत देती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अब पहली बार निवेशकों को जापानी सरकारी बॉन्ड रखने पर आकर्षक रिटर्न मिलने लगा है।
बैंक ऑफ जापान की नीति में बदलाव बना बड़ी वजह
कई वर्षों तक बैंक ऑफ जापान ने यील्ड कर्व कंट्रोल (YCC) नीति के तहत 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड को लगभग शून्य के आसपास बनाए रखा था। लेकिन मार्च 2024 में इस नीति को समाप्त करने के बाद धीरे-धीरे ब्याज दरों का सामान्यीकरण शुरू हुआ, जिससे बॉन्ड यील्ड में तेजी देखने को मिली।
विशेषज्ञ बोले- जापानी बॉन्ड अब निवेश योग्य बने
स्टेट स्ट्रीट इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट के फिक्स्ड इनकम रणनीतिकार मसाहिको लू का कहना है कि कई वर्षों बाद जापानी सरकारी बॉन्ड वैश्विक निवेशकों के लिए फिर से निवेश योग्य बन गए हैं।
वहीं रिसर्च फर्म Gavekal के सह-संस्थापक चार्ल्स गेव ने जापान के लॉन्ग-टर्म सरकारी बॉन्ड को दुनिया के सबसे आकर्षक बॉन्ड बाजारों में से एक बताया। उनका मानना है कि जिन निवेशकों के पास जापान में निवेश नहीं है, उन्हें अपने पोर्टफोलियो में शेयर और बॉन्ड दोनों को संतुलित रूप से शामिल करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं और जापानी येन मजबूत होता है, तो आने वाले समय में लंबे अवधि वाले जापानी बॉन्ड, येन के हिसाब से सोने से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
हर विशेषज्ञ नहीं है पूरी तरह सहमत
हालांकि सभी विश्लेषक इस राय से सहमत नहीं हैं।
जर्मनी की एसेट मैनेजमेंट कंपनी DWS का मानना है कि यूरोप का बॉन्ड बाजार अभी भी अधिक आकर्षक बना हुआ है। इसकी वजह यूरोपीय सेंट्रल बैंक की ऊंची नीति दर और अपेक्षाकृत मजबूत ऋण स्थिरता है।
विश्लेषकों का कहना है कि जापान का Debt-to-GDP Ratio 200% से अधिक है, जबकि यूरोपीय संघ में यह करीब 82% के आसपास है। ऐसे में जापान के बढ़ते सरकारी कर्ज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
वैश्विक बॉन्ड बाजार पर भी दिख रहा असर
विशेषज्ञों के अनुसार, जापानी बॉन्ड यील्ड बढ़ने के साथ विदेशी निवेशक फिर से जापान के 20 से 30 वर्षीय बॉन्ड में निवेश कर रहे हैं। वर्ष 2026 में अब तक रिकॉर्ड 9.3 ट्रिलियन येन लंबी अवधि वाले जापानी बॉन्ड में निवेश किया जा चुका है।
साथ ही, बढ़ती घरेलू यील्ड के कारण जापानी निवेशक विदेशी बाजारों से पूंजी वापस ला रहे हैं। केवल 2026 की पहली तिमाही में उन्होंने लगभग 29.6 अरब अमेरिकी डॉलर के अमेरिकी सरकारी बॉन्ड बेचे हैं। इससे वैश्विक बॉन्ड बाजार में पूंजी प्रवाह और सरकारी उधारी पर असर पड़ सकता है।
अभी भी बने हुए हैं कुछ बड़े जोखिम
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जापानी बॉन्ड बाजार में अवसर तो बढ़े हैं, लेकिन जोखिम भी कम नहीं हैं। सरकार की बढ़ती वित्तीय चुनौतियां, बैंक ऑफ जापान द्वारा ब्याज दरों में आगे होने वाले फैसले और मध्य-पूर्व का भू-राजनीतिक तनाव आने वाले समय में बॉन्ड यील्ड और निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल, FAQs
1. जापान के सरकारी बॉन्ड चर्चा में क्यों हैं?
क्योंकि 10 वर्षीय जापानी सरकारी बॉन्ड की यील्ड 1996 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है, जिससे निवेशकों की दिलचस्पी फिर बढ़ी है।
2. बॉन्ड यील्ड बढ़ने की मुख्य वजह क्या है?
बैंक ऑफ जापान द्वारा यील्ड कर्व कंट्रोल नीति समाप्त करने और मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की प्रक्रिया इसके प्रमुख कारण हैं।
3. क्या जापानी बॉन्ड सोने से बेहतर निवेश बन सकते हैं?
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि येन मजबूत होता है और तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो लंबी अवधि के जापानी बॉन्ड सोने से बेहतर रिटर्न दे सकते हैं।
4. जापान के बॉन्ड बाजार में सबसे बड़ा जोखिम क्या है?
देश का 200% से अधिक Debt-to-GDP Ratio, सरकारी खर्च, संभावित ब्याज दर वृद्धि और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव प्रमुख जोखिम हैं।
5. जापानी बॉन्ड बाजार का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि जापानी निवेशक विदेशी बाजारों से पूंजी वापस लाते हैं, तो अमेरिका और अन्य देशों के बॉन्ड बाजार, वैश्विक पूंजी प्रवाह और उधारी लागत पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
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