OMFIF Report: वैश्विक वित्तीय संस्था OMFIF (Official Monetary and Financial Institutions Forum) के ताजा सर्वे में सामने आया है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक धीरे-धीरे अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम कर रहे हैं। इसके साथ ही वे अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने, यूरो, चीनी रॅन्मिन्बी, अंतरराष्ट्रीय शेयरों और कॉर्पोरेट बॉन्ड्स की हिस्सेदारी बढ़ाने की रणनीति अपना रहे हैं।
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यह सर्वे 90 से अधिक केंद्रीय बैंकों, पेंशन फंडों और सॉवरेन वेल्थ फंड्स पर आधारित है, जो सामूहिक रूप से लगभग 10 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर की परिसंपत्तियों का प्रबंधन करते हैं।
डॉलर से दूरी, लेकिन पूरी तरह नहीं होगा अंत
OMFIF रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंक पहली बार अपने विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी कम कर रहे हैं। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि डॉलर अपनी वैश्विक स्थिति खो देगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव रिस्क डाइवर्सिफिकेशन (Diversification) की रणनीति का हिस्सा है। अनुमान है कि अगले 10 वर्षों में वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर की हिस्सेदारी 58 प्रतिशत से घटकर लगभग 50 प्रतिशत रह सकती है, जबकि चीनी रॅन्मिन्बी की हिस्सेदारी 2 प्रतिशत से बढ़कर 5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
केंद्रीय बैंक लगातार क्यों खरीद रहे हैं सोना?
OMFIF रिपोर्ट में गोल्ड सेक्शन की लेखिका एंड्रिया कोरिया के अनुसार, केंद्रीय बैंकों द्वारा पिछले कुछ वर्षों से बड़े पैमाने पर सोने की खरीदारी के पीछे दो प्रमुख कारण हैं।
1. पोर्टफोलियो का विविधीकरण
सर्वे में शामिल लगभग 70 प्रतिशत केंद्रीय बैंकों ने बताया कि विदेशी मुद्रा भंडार को संतुलित और सुरक्षित बनाने के लिए सोना सबसे महत्वपूर्ण विकल्प बन गया है।
2. भू-राजनीतिक जोखिमों से सुरक्षा
करीब 50 प्रतिशत केंद्रीय बैंकों ने माना कि बढ़ते वैश्विक तनाव, आर्थिक प्रतिबंधों और राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच सोना सबसे सुरक्षित निवेश (Safe Haven Asset) साबित हो रहा है।
दुनिया तेजी से बढ़ रही है बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर
सर्वे के मुताबिक 79 प्रतिशत केंद्रीय बैंक मानते हैं कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अब बहुध्रुवीय (Multipolar) व्यवस्था की ओर बढ़ रही है।
इस नई व्यवस्था में क्षेत्रीय व्यापार समझौते, स्थानीय मुद्राओं का उपयोग और विविध रिजर्व परिसंपत्तियों की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण होगी। ऐसे माहौल में सोना एक रणनीतिक संपत्ति के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत करता दिखाई दे रहा है क्योंकि इसमें किसी प्रकार का क्रेडिट जोखिम नहीं होता।
2027 तक 5,000 डॉलर पहुंच सकता है सोना
OMFIF रिपोर्ट के अनुसार, कई बड़े केंद्रीय बैंक और वैश्विक फंड मैनेजरों को उम्मीद है कि 2027 के मध्य तक सोने की कीमत 5,000 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है।
इस संभावित तेजी के पीछे कई प्रमुख कारण बताए गए हैं:
- केंद्रीय बैंकों की लगातार मजबूत खरीदारी।
- बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव।
- आर्थिक प्रतिबंधों का जोखिम।
- वैश्विक स्तर पर बढ़ता सरकारी कर्ज।
- महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता।
क्या डॉलर की जगह कोई दूसरी मुद्रा ले पाएगी?
एंड्रिया कोरिया का मानना है कि आने वाले वर्षों में किसी एक मुद्रा का पूर्ण प्रभुत्व नहीं होगा। वैश्विक रिजर्व प्रणाली में डॉलर, सोना, यूरो और चीनी रॅन्मिन्बी का मिश्रित मॉडल देखने को मिल सकता है।
हालांकि डॉलर की हिस्सेदारी घट सकती है, लेकिन निकट भविष्य में उसके वैश्विक रिजर्व मुद्रा के रूप में प्रमुख स्थान को चुनौती मिलना आसान नहीं होगा।
मुख्य बातें (Key Highlights)
- OMFIF ने 90 से अधिक केंद्रीय बैंक और वैश्विक फंडों का सर्वे किया।
- केंद्रीय बैंक अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता धीरे-धीरे कम कर रहे हैं।
- अगले 10 वर्षों में डॉलर की हिस्सेदारी 58% से घटकर 50% रहने का अनुमान।
- केंद्रीय बैंकों की पहली पसंद बना सोना।
- 70% बैंक पोर्टफोलियो विविधीकरण के लिए सोना खरीद रहे हैं।
- 50% बैंक भू-राजनीतिक जोखिमों से बचाव के लिए गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं।
- 79% केंद्रीय बैंक दुनिया को बहुध्रुवीय आर्थिक व्यवस्था की ओर बढ़ता देख रहे हैं।
- कई संस्थानों को 2027 के मध्य तक सोने के 5,000 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने की उम्मीद।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल, FAQ’s
1. OMFIF की रिपोर्ट में केंद्रीय बैंकों ने डॉलर को लेकर क्या संकेत दिए हैं?
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के कई केंद्रीय बैंक अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता धीरे-धीरे कम कर रहे हैं। हालांकि इसका मतलब डॉलर का अंत नहीं है, बल्कि वे अपने विदेशी मुद्रा भंडार को अधिक संतुलित बनाने के लिए सोना, यूरो, चीनी रॅन्मिन्बी और अन्य परिसंपत्तियों में निवेश बढ़ा रहे हैं।
2. केंद्रीय बैंक लगातार सोना क्यों खरीद रहे हैं?
OMFIF सर्वे के अनुसार, केंद्रीय बैंकों के लिए सोना पोर्टफोलियो विविधीकरण, पूंजी की सुरक्षा और भू-राजनीतिक जोखिमों से बचाव का सबसे भरोसेमंद साधन बन गया है। यही कारण है कि हाल के वर्षों में केंद्रीय बैंक रिकॉर्ड स्तर पर सोने की खरीदारी कर रहे हैं।
3. क्या डॉलर का वैश्विक प्रभुत्व खत्म होने वाला है?
विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर का प्रभुत्व पूरी तरह समाप्त नहीं होगा। हालांकि आने वाले वर्षों में उसकी हिस्सेदारी कुछ कम हो सकती है, लेकिन वह वैश्विक रिजर्व मुद्रा के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका बनाए रखेगा।
4. OMFIF रिपोर्ट में सोने के भविष्य को लेकर क्या अनुमान लगाया गया है?
रिपोर्ट के मुताबिक कई केंद्रीय बैंक और बड़े वैश्विक फंड मानते हैं कि मजबूत केंद्रीय बैंक मांग, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण 2027 के मध्य तक सोने की कीमत 5,000 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है।
5. बहुध्रुवीय (Multipolar) वैश्विक व्यवस्था का सोने पर क्या असर होगा?
यदि वैश्विक वित्तीय प्रणाली बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ती है, तो विभिन्न मुद्राओं और सुरक्षित परिसंपत्तियों की भूमिका बढ़ेगी। ऐसे वातावरण में सोना, जिसकी कोई क्रेडिट रिस्क नहीं होती, केंद्रीय बैंकों और निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक रिजर्व एसेट बना रह सकता है।
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