Gold Price Forecast: वैश्विक निवेश बैंक बैंक ऑफ अमेरिका (Bank of America) ने वर्ष 2026 के लिए अपने औसत सोने के मूल्य अनुमान में 14 प्रतिशत की कटौती करते हुए इसे 4,360 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस कर दिया है। बैंक का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त मौद्रिक रुख और ऊंची ब्याज दरों की संभावना निकट अवधि में सोने की कीमतों पर दबाव बनाए रख सकती है।
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हालांकि, बैंक ने अपने दीर्घकालिक दृष्टिकोण में कोई बदलाव नहीं किया है। उसका मानना है कि जैसे ही वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दौर समाप्त होगा, सोने की कीमतें 6,000 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं।
फेड की सख्त नीति से क्यों दबाव में है सोना?
बैंक ऑफ अमेरिका के अनुसार, जब फेडरल रिजर्व ब्याज दरें ऊंची रखने या बढ़ाने का संकेत देता है, तब रियल बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी डॉलर मजबूत होते हैं। ऐसे माहौल में निवेशक बिना ब्याज देने वाली संपत्ति जैसे सोने की बजाय बॉन्ड जैसे ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों को प्राथमिकता देते हैं, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव बनता है।
अमेरिका का बढ़ता कर्ज फेड की चुनौती
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका पर लगभग 39.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का राष्ट्रीय कर्ज है और सरकार को हर वर्ष 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक केवल ब्याज भुगतान पर खर्च करना पड़ रहा है।
ऐसी स्थिति में यदि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में लगातार बढ़ोतरी करता है, तो सरकार के लिए कर्ज का बोझ और अधिक बढ़ सकता है। यही कारण है कि बैंक का मानना है कि फेड की ब्याज दरें बढ़ाने की क्षमता सीमित हो सकती है।
चीन ने गिरते बाजार में भी बढ़ाई सोने की खरीद
जब वैश्विक बाजार में सोना दबाव में था, तब चीन के केंद्रीय बैंक (PBOC) ने जून 2026 में लगभग 14.93 टन सोना खरीदा।
यह 2023 के बाद चीन की सबसे बड़ी मासिक खरीदारी मानी जा रही है और ऐसे समय हुई जब सोना पिछले कई वर्षों की सबसे कमजोर तिमाही से गुजर रहा था। इससे यह संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक लंबी अवधि में सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में देख रहे हैं।
केंद्रीय बैंकों का सोने पर भरोसा बरकरार
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, 89 प्रतिशत केंद्रीय बैंकों का मानना है कि अगले 12 महीनों में वैश्विक केंद्रीय बैंक अपने स्वर्ण भंडार में और बढ़ोतरी करेंगे।
यह आंकड़ा दर्शाता है कि आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच सोना अभी भी केंद्रीय बैंकों की रणनीतिक परिसंपत्ति बना हुआ है।
मध्य पूर्व तनाव और महंगी ऊर्जा का असर
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने वैश्विक महंगाई की चिंताओं को फिर बढ़ा दिया है। महंगाई को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरें ऊंची बनाए रख सकते हैं, जिससे निकट अवधि में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
लंबी अवधि में क्यों बुलिश है बैंक ऑफ अमेरिका?
बैंक ऑफ अमेरिका का मानना है कि वर्तमान में ऊंची ब्याज दरें सोने पर दबाव बना रही हैं, लेकिन यह स्थिति स्थायी नहीं रहेगी।
यदि फेडरल रिजर्व भविष्य में ब्याज दरों में बढ़ोतरी रोकता है या दरों में कटौती शुरू करता है, तो सोने में निवेशकों की मांग तेजी से बढ़ सकती है। इसी आधार पर बैंक ने 6,000 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस का दीर्घकालिक लक्ष्य बरकरार रखा है
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. बैंक ऑफ अमेरिका ने 2026 के लिए सोने का अनुमान क्यों घटाया है?
बैंक ऑफ अमेरिका ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख, ऊंची ब्याज दरों की संभावना और मजबूत अमेरिकी डॉलर को देखते हुए 2026 के लिए अपने औसत गोल्ड प्राइस अनुमान में 14 प्रतिशत की कटौती की है। बैंक का मानना है कि ये कारक निकट अवधि में सोने की कीमतों पर दबाव बनाए रख सकते हैं।
2. क्या बैंक ऑफ अमेरिका अभी भी सोने को लेकर सकारात्मक है?
हाँ। निकट अवधि का अनुमान घटाने के बावजूद बैंक ऑफ अमेरिका का दीर्घकालिक दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है। बैंक का मानना है कि जैसे ही ब्याज दरों में बढ़ोतरी का चक्र समाप्त होगा, सोने की कीमतें 6,000 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं।
3. चीन की सोने की खरीदारी का बाजार पर क्या असर पड़ सकता है?
चीन के केंद्रीय बैंक द्वारा जून 2026 में लगभग 14.93 टन सोने की खरीद यह दर्शाती है कि केंद्रीय बैंक लंबी अवधि में सोने पर भरोसा बनाए हुए हैं। इससे वैश्विक बाजार में सोने की मांग को समर्थन मिल सकता है।
4. फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें सोने की कीमतों को कैसे प्रभावित करती हैं?
जब फेड ब्याज दरें बढ़ाता है, तब बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी डॉलर मजबूत होते हैं। ऐसे में निवेशक सोने की बजाय ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों की ओर आकर्षित होते हैं, जिससे सोने की मांग और कीमतों पर दबाव पड़ता है।
5. सोने की लंबी अवधि की संभावनाएं कैसी हैं?
बैंक ऑफ अमेरिका का मानना है कि वर्तमान दबाव अस्थायी है। यदि भविष्य में फेड ब्याज दरों में बढ़ोतरी रोकता है या दरों में कटौती शुरू करता है तथा केंद्रीय बैंक सोने की खरीद जारी रखते हैं, तो आने वाले वर्षों में सोने की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिल सकती है।
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डिस्क्लेमर: ये न्यूज सिर्फ जानकारी के लिए बनाई गई है, निवेश या ट्रेडिंग की सलाह नहीं है। स्टोरी में दी गई राय एक्सपर्ट और ब्रोकरेज हाउस की है। गोल्ड प्राइस टुडे से जुड़े लोग निजी तौर पर सोने, चांदी की ट्रेडिंग नहीं करते हैं। हमारी सोने, चांदी में कोई पोजीशन नहीं है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें। सोने चांदी में निवेश जोखिम का काम है अपने विवेक का इस्तेमाल करें। आपको होने वाले किसी भी नुकसान की हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है।



