Tuesday, June 30, 2026
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StoneX की सोने, चांदी पर राय, क्या कीमतों पर बना रहेगा दबाव, जानिए क्या कहती है रिपोर्ट?

StoneX Report: वैश्विक बाजारों में मंदी की मार और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के चलते सोने और चांदी की कीमतों पर चौतरफा दबाव देखा जा रहा है। ब्रोकरेज फर्म Stonex के मुताबिक, सोने की कीमतें कुछ समय के लिए 4,000 डॉलर के नीचे गोता लगाने के बाद फिलहाल 4,330 डॉलर के नीचे ट्रेड कर रही हैं, जबकि चांदी टूटकर 68 डॉलर के निचले स्तर पर आ गई है। दोनों ही कीमती धातुएं इस समय 23 मार्च के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर हैं। अमेरिका द्वारा आगामी 24 जुलाई से भारत, चीन और यूरोपीय संघ (EU) समेत कई देशों पर लगाए जाने वाले नए आयात शुल्क (Tariffs) के डर ने इस गिरावट को और हवा दी है और Stonex का मनना है कि 24 जुलाई के टैरिफ के डर से सोने-चांदी पर फिलहाल मंदी के बादल छाए रहेंगे।

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सोने में बना ‘डेथ क्रॉस’ (Death Cross)

बाजार विश्लेषकों और निवेशकों के लिए इस समय चार्ट पर तकनीकी संकेत काफी चिंताजनक बने हुए हैं:

  • मूविंग एवरेज (Moving Averages): सोना और चांदी दोनों ही अपने चारों प्रमुख मूविंग एवरेज से नीचे आ चुके हैं।
  • डेथ क्रॉस का संकेत: सोने के चार्ट पर ‘डेथ क्रॉस’ (Death Cross) बन चुका है, जिसे तकनीकी भाषा में बाजार के लंबी अवधि के लिए मंदी (Bearish Zone) में जाने का सबसे पुख्ता संकेत माना जाता है।
  • चांदी की स्थिति: चांदी का 20-दिन का मूविंग एवरेज भी तेजी से उसके 10-दिन के एवरेज से नीचे जाने की कगार पर है।

ETFs से निवेशकों का मोहभंग, जून में भारी निकासी

सुरक्षित निवेश के रूप में जाने जाने वाले गोल्ड और सिल्वर ETFs (Exchange Traded Funds) में निवेशकों की दिलचस्पी लगातार कम हो रही है। Stonex के आंकड़ों के अनुसार, अकेले जून महीने में निवेशकों ने सिल्वर ETF से 260 टन चांदी की भारी-भरकम निकासी (विड्रॉल) की है, जो बाजार में कमजोर सेंटिमेंट को दर्शाता है।

अमेरिकी टैरिफ का डर और Silver-Gold Ratio

ग्लोबल ट्रेड वॉर की आहट ने कमोडिटी मार्केट को डरा दिया है। 24 जुलाई से अमेरिका द्वारा भारत, चीन, ईयू और जापान पर बड़े पैमाने पर नए आयात शुल्क लगाने की योजना है।

औद्योगिक मांग पर असर: कंपनियों को डर है कि नए टैरिफ से शिपिंग और ईंधन की लागत में भारी इजाफा होगा। इसका सीधा नुकसान चांदी को हो रहा है, क्योंकि इसकी औद्योगिक मांग बहुत अधिक होती है।

यही वजह है कि चांदी का प्रदर्शन सोने के मुकाबले काफी कमजोर है। वर्तमान में चांदी और सोने का अनुपात (Silver:Gold Ratio) अमेरिकी 2-साल की बॉन्ड यील्ड के साथ 98% का मजबूत कोरिलेशन (समानता) दिखा रहा है।

क्या अब आएगी रिकवरी? ‘ओवर्सोल्ड’ ज़ोन में मार्केट

  • RSI (रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स): तकनीकी मोर्चे पर एकमात्र राहत की बात यह है कि RSI के अनुसार सोना-चांदी दोनों इस समय ‘ओवर्सोल्ड’ (Oversold) ज़ोन में प्रवेश कर चुके हैं। इसका मतलब है कि कीमतें अपनी क्षमता से ज्यादा गिर चुकी हैं।
  • बार्गेन हंटिंग की उम्मीद: अब पूरी नजर इस बात पर है कि क्या एशियाई बाजारों में और बिकवाली आएगी, या फिर इन निचले स्तरों पर खरीदार सक्रिय होकर बार्गेन हंटिंग (कम कीमत पर खरीदारी) शुरू करेंगे।
  • COMEX मार्केट की स्थिति: COMEX में मनी मैनेजर्स ने सोने में अपनी शॉर्ट पोजीशन (बिकवाली के दांव) कम की है। इतिहास गवाह है कि जब शॉर्ट्स बहुत कम हो जाते हैं, तो इसे ‘बेयर सिग्नल’ माना जाता है, क्योंकि शॉर्ट-कवरिंग के दम पर बाजार में अचानक तेजी आने की गुंजाइश खत्म हो जाती है।

भारतीय निवेशकों के लिए क्या है स्थिति?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस साल अब तक डॉलर के मुकाबले सोने में करीब 3% की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। हालांकि, भारतीय निवेशकों के लिए घरेलू बाजार (MCX) में स्थिति अलग है। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया (Rupee) कमजोर होने के कारण, रूपए के संदर्भ में सोना इस साल अब भी करीब 4% के मुनाफे (+) के साथ ट्रेड कर रहा है।

Stonex की रिपोर्ट साफ इशारा करती है कि अमेरिकी फेड के कड़े रुख, महंगाई के दबाव और आगामी 24 जुलाई के टैरिफ के डर से सोने-चांदी पर फिलहाल मंदी के बादल छाए रहेंगे और किसी बड़ी या तात्कालिक तेजी की संभावना बेहद कम है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल, FAQ’s

1. Stonex की रिपोर्ट के अनुसार सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट क्यों आ रही है?
Stonex के मुताबिक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति, वैश्विक आर्थिक सुस्ती, कमजोर निवेशक धारणा और 24 जुलाई 2026 से लागू होने वाले संभावित अमेरिकी आयात शुल्क (Tariffs) की आशंका ने सोने और चांदी दोनों पर दबाव बढ़ा दिया है। इन कारणों से निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं।

2. सोने में बना ‘डेथ क्रॉस’ (Death Cross) क्या संकेत देता है?
‘डेथ क्रॉस’ एक महत्वपूर्ण तकनीकी संकेत है, जो तब बनता है जब अल्पकालिक मूविंग एवरेज दीर्घकालिक मूविंग एवरेज के नीचे चला जाता है। इसे आमतौर पर बाजार में लंबी अवधि की कमजोरी या मंदी का संकेत माना जाता है। Stonex के अनुसार फिलहाल सोने का चार्ट इसी प्रकार का संकेत दे रहा है।

3. क्या Gold और Silver ETFs से निवेशकों की निकासी बाजार के लिए चिंता का विषय है?
हाँ। जून 2026 में सिल्वर ETF से लगभग 260 टन चांदी की निकासी दर्शाती है कि निवेशकों का भरोसा फिलहाल कमजोर हुआ है। ETF से लगातार निकासी आमतौर पर बाजार में कमजोर मांग और नकारात्मक निवेशक भावना का संकेत मानी जाती है।

4. क्या मौजूदा गिरावट के बाद सोने और चांदी में रिकवरी की संभावना है?
Stonex का कहना है कि RSI के अनुसार दोनों धातुएं फिलहाल Oversold Zone में पहुंच चुकी हैं, जिससे सीमित अवधि की तकनीकी रिकवरी या निचले स्तरों पर खरीदारी (Bargain Hunting) देखने को मिल सकती है। हालांकि, जब तक वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और अमेरिकी टैरिफ को लेकर स्पष्टता नहीं आती, तब तक बड़ी तेजी की संभावना सीमित मानी जा रही है।

5. अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट के बावजूद भारतीय निवेशकों के लिए सोने की स्थिति कैसी है?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के आधार पर सोना इस वर्ष लगभग 3% कमजोर हुआ है। हालांकि भारतीय रुपये की कमजोरी के कारण घरेलू बाजार (MCX) में सोना अभी भी लगभग 4% के लाभ के साथ कारोबार कर रहा है। इसलिए भारतीय निवेशकों पर वैश्विक गिरावट का प्रभाव अपेक्षाकृत कम देखने को मिला है।

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डिस्क्लेमर: ये न्यूज सिर्फ जानकारी के लिए बनाई गई है, निवेश या ट्रेडिंग की सलाह नहीं है। स्टोरी में दी गई राय एक्सपर्ट और ब्रोकरेज हाउस की है। गोल्ड प्राइस टुडे से जुड़े लोग निजी तौर पर सोने, चांदी की ट्रेडिंग नहीं करते हैं। हमारी सोने, चांदी में कोई पोजीशन नहीं है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें। सोने चांदी में निवेश जोखिम का काम है अपने विवेक का इस्तेमाल करें। आपको होने वाले किसी भी नुकसान की हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है।

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