BOE Interest Rates: वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी भारी उथल-पुथल और मध्य पूर्व (Middle East) के तनाव के बीच, ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक ने एक बड़ा और सतर्क कदम उठाया है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और महंगाई (Inflation) की दोहरी चुनौती से जूझते हुए, बैंक ऑफ इंग्लैंड ने दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। दुनिया भर के निवेशकों की निगाहें इस फैसले पर टिकी थीं। ईरान युद्ध (Iran War) में शांति की सुगबुगाहट के बीच लिया गया यह फैसला बताता है कि नीति निर्माता फिलहाल आक्रामक होने के बजाय स्थिति का आकलन करने के लिए Wait and Watch की रणनीति अपना रहे हैं।
मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee – MPC) ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि महंगाई का दबाव (inflationary pressures) अभी बना रहेगा। उच्च ऊर्जा कीमतें लगातार यूके की अर्थव्यवस्था पर बोझ डाल रही हैं और महंगाई के परिदृश्य को जटिल बना रही हैं। दरों को स्थिर रखने के इस फैसले के बावजूद, वित्तीय बाजार अभी भी इस संभावना को मानकर चल रहे हैं कि इस साल के अंत से पहले ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी हो सकती है।
मतदान का गणित: 7 सदस्यों ने किया ठहराव का समर्थन
ब्याज दरों को स्थिर रखने का यह फैसला रॉयटर्स (Reuters) के अर्थशास्त्रियों के अनुमानों के अनुरूप था। मई की बैठक में मौद्रिक नीति समिति के नौ में से सात सदस्यों ने इस फैसले का समर्थन किया। हालांकि, बैंक ऑफ इंग्लैंड के मुख्य अर्थशास्त्री ह्यू पिल (Huw Pill) और एक बाहरी सदस्य मेगन ग्रीन (Megan Greene) ने इससे असहमति जताई। इन दोनों ने ‘बेस रेट’ में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 4% करने के पक्ष में मतदान किया।
ऊर्जा संकट और महंगाई की दोहरी मार
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब ईरान युद्ध के बाद ऊर्जा लागत बढ़ने से दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई बढ़ी है। यूके, जो मुख्य रूप से ऊर्जा का आयात करता है, मूल्य के झटकों (Price Shocks) के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील है।
- अर्थव्यवस्था के आंकड़े: परिवहन ईंधन की बढ़ती लागत के कारण मई में यूके की महंगाई दर अनुमान से थोड़ी कम 2.8% रही। वहीं, पिछले सप्ताह प्रकाशित आंकड़ों से पता चला है कि अप्रैल में अर्थव्यवस्था में 0.1% की गिरावट आई है।
- बढ़ेगी ऊर्जा लागत: अप्रैल में महंगाई 2.8% तक कम हुई थी, जिसका कारण ऊर्जा मूल्य कैप (energy price cap) में बदलाव था, लेकिन यह राहत अल्पकालिक रहने की उम्मीद है। इस गर्मियों में प्राइस कैप 13% बढ़ने वाला है, जिससे ऊर्जा लागत 2 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच जाएगी।
बैंक ऑफ इंग्लैंड ने कहा, “अर्थव्यवस्था और महंगाई पर इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि ऊर्जा की कीमतें कितने समय तक उच्च स्तर पर रहती हैं। हमारी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि उच्च महंगाई लंबे समय तक न बनी रहे।”
ईरान शांति वार्ता (Iran Peace Prospects) और बाजार
मध्य पूर्व के एक महत्वपूर्ण तेल शिपिंग मार्ग, स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज (Strait of Hormuz) के प्रभावी रूप से बंद होने के कारण तेल की कीमतें उच्च बनी हुई हैं। हालांकि, वाशिंगटन और तेहरान के बीच शांति वार्ता में एक बड़ी सफलता मिली है।
बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन (Masoud Pezeshkian) ने चार महीने से चल रहे युद्ध के लिए एक स्थायी शांति समझौते की आधारशिला रखने के उद्देश्य से 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षर किए हैं।
वैश्विक केंद्रीय बैंकों का रुख
फेडरल रिजर्व (US Fed): बैंक ऑफ इंग्लैंड का यह कदम अमेरिकी फेडरल रिजर्व के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें केविन वॉर्श (Kevin Warsh) की अध्यक्षता में फेड फंड्स रेट को 3.5%-3.75% पर स्थिर रखा गया था।
ECB और BOJ: पिछले सप्ताह यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) ऊर्जा संकट के जवाब में अपनी प्रमुख ब्याज दर बढ़ाने वाला पहला प्रमुख केंद्रीय बैंक बन गया। इसके बाद मंगलवार को बैंक ऑफ जापान (BOJ) ने भी अपनी नीतिगत दर को बढ़ाकर 1% कर दिया, जो 31 साल का उच्चतम स्तर है।
विशेषज्ञों की राय
ल्यूक बार्थोलोम्यू (डिप्टी चीफ इकोनॉमिस्ट, एबरडीन): “हमें लगता है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड उस तरह की मौद्रिक सख्ती से बच सकेगा जो यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने शुरू की है। यदि ऊर्जा की कीमतें नरम होती हैं, तो दर कटौती पर भी बहस शुरू हो सकती है, लेकिन इसके लिए अगले साल तक इंतजार करना पड़ सकता है।”
जॉर्ज ब्राउन (सीनियर इकोनॉमिस्ट, श्रोडर्स): “बैंक ऑफ इंग्लैंड महंगाई के खतरों के प्रति लापरवाह नहीं हो सकता। अभी के लिए, बैंक आक्रामक होने के बजाय समय ले रहा है। दर बढ़ोतरी के लिए मानक अभी भी ऊंचे हैं।”
सुरेन थिरु (चीफ इकोनॉमिस्ट, ICAEW): “यूके की मौद्रिक नीति अब एक चौराहे पर खड़ी है। अमेरिका-ईरान शांति ढांचे ने उम्मीदें बढ़ाई हैं कि बिना किसी और सख्ती के महंगाई कम हो सकती है, लेकिन यदि शत्रुता फिर से शुरू होती है, तो संतुलन वापस दर बढ़ोतरी की ओर झुक सकता है।”
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल, FAQ’s
1. बैंक ऑफ इंग्लैंड ने ब्याज दरों में बदलाव क्यों नहीं किया?
बैंक ऑफ इंग्लैंड ने ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी, महंगाई के दबाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को देखते हुए फिलहाल “वेट एंड वॉच” रणनीति अपनाई है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय आर्थिक आंकड़ों और महंगाई की दिशा का आकलन करना अधिक उचित होगा।
2. बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति समिति (MPC) में मतदान का परिणाम क्या रहा?
MPC के 9 सदस्यों में से 7 ने ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने के पक्ष में मतदान किया। वहीं मुख्य अर्थशास्त्री ह्यू पिल और बाहरी सदस्य मेगन ग्रीन ने 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर बेस रेट को 4% करने का समर्थन किया।
3. ऊर्जा कीमतों का बैंक ऑफ इंग्लैंड के फैसले पर क्या प्रभाव पड़ा?
यूके ऊर्जा आयात पर काफी निर्भर है। ईरान संकट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यवधान के कारण तेल और गैस की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। इससे महंगाई पर दबाव बढ़ा है, जिसके चलते बैंक ऑफ इंग्लैंड दरों में कटौती करने से बच रहा है।
4. क्या इस साल यूके में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है?
हाँ। दरों को स्थिर रखने के बावजूद वित्तीय बाजार अभी भी मान रहे हैं कि यदि महंगाई अपेक्षा से अधिक बनी रहती है या ऊर्जा कीमतें और बढ़ती हैं, तो 2026 के अंत से पहले बैंक ऑफ इंग्लैंड एक और ब्याज दर वृद्धि कर सकता है।
5. वैश्विक केंद्रीय बैंकों के हालिया फैसलों की तुलना में BOE का रुख कैसा है?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने भी हाल ही में दरों को स्थिर रखा, जबकि यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) और बैंक ऑफ जापान (BOJ) ने ऊर्जा संकट और महंगाई से निपटने के लिए दरें बढ़ाई हैं। BOE फिलहाल अधिक सतर्क रुख अपनाते हुए आर्थिक परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए है।
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