Monday, June 15, 2026
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ANZ Gold Outlook: ANZ ने घटाया अपना गोल्ड टारगेट, जानिए क्या कहती है रिपोर्ट?

ANZ Gold Outlook: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, ऊंची बॉन्ड यील्ड और मजबूत अमेरिकी डॉलर के दबाव के बीच ANZ ने साल के अंत के लिए सोने का लक्ष्य (Gold Target) घटा दिया है। हालिया कमजोरी को देखते हुए बैंक ने साल के अंत के लिए गोल्ड प्राइस टारगेट 5,600 डॉलर प्रति औंस से घटाकर 5,200 डॉलर प्रति औंस कर दिया है। हालांकि, ANZ का मानना है कि मौजूदा गिरावट के बावजूद सोने और चांदी की दीर्घकालिक निवेश कहानी अभी भी मजबूत बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, शॉर्ट-टर्म में कीमती धातुओं पर दबाव बना रह सकता है, लेकिन डी-डॉलराइजेशन, बढ़ता वैश्विक कर्ज, संभावित फेड रेट कटौती और चांदी की सीमित आपूर्ति जैसे संरचनात्मक कारक आने वाले वर्षों में सोने-चांदी की कीमतों को मजबूत समर्थन प्रदान कर सकते हैं।

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कीमत का नया अनुमान (Price Forecast)

रिपोर्ट के अनुसार, इन स्तरों पर दोबारा बड़े निवेशक खरीदारी (Strategic Investment) शुरू कर सकते हैं क्योंकि सोना आज भी जोखिम से बचने का सबसे अच्छा जरिया (Hedge) है। हालांकि, मौजूदा मध्यम से दीर्घकालिक सकारात्मक नजरिए को बरकरार रखते हुए, हालिया गिरावट को देखते हुए साल के अंत के लिए सोने का लक्ष्य 5,600 डॉलर से घटाकर 5,200 डॉलर प्रति औंस (oz) कर दिया गया है।

शॉर्ट-टर्म का दबाव (कम अवधि का हाल)

शॉर्ट-टर्म में सोने की कीमत महंगाई के कारण ब्याज दरों में होने वाले बदलाव, अमेरिका के ऊंचे बॉन्ड यील्ड्स (US Yields) और शेयर बाजार में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को लेकर मचे उत्साह के प्रति संवेदनशील रहेगी।

लॉन्ग-टर्म का सपोर्ट (लंबी अवधि की उम्मीद)

भले ही अभी गिरावट है, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितता (युद्ध का माहौल), दुनिया भर पर बढ़ता कर्ज और इस साल के अंत में फेडरल रिजर्व (Fed) द्वारा ब्याज दर में कटौती की उम्मीद सोने की निवेश वैल्यू को मजबूत बनाए रखेगी।

चांदी (Silver) का हाल

चांदी को पिछले साल और इस साल की शुरुआत में जिन वजहों से मजबूती मिली थी, वे अब कमजोर पड़ चुकी हैं। हालांकि, बाजार में चांदी की कम आपूर्ति (Undersupplied Market) के कारण जल्द ही इसकी कीमत को एक मजबूत सपोर्ट (Floor) मिल सकता है।

मध्य पूर्व तनाव के बीच सोने ने गंवाई बढ़त

रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव के कारण इस साल सोने ने अपनी बढ़त का 3% हिस्सा गंवा दिया है। युद्ध के कारण ऊर्जा (क्रूड ऑयल) की कीमत ऊंची रहने का खतरा बढ़ा है, जिससे बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी डॉलर (USD) मजबूत हुए हैं। जब से यह विवाद (फरवरी के अंत में) शुरू हुआ है, तब से सोना अब तक 20% से अधिक टूट चुका है।

सोना इस संकट में क्यों नहीं बढ़ रहा है?

आमतौर पर युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव में सोने की कीमत बढ़ती है क्योंकि इसे सुरक्षित निवेश माना जाता है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है, इसके तीन मुख्य कारण हैं:

  1. ऊंचा बॉन्ड यील्ड (US 10Y Treasury Yield): अमेरिका में 10 साल के सरकारी बॉन्ड पर ब्याज (Yield) करीब 4.6% के आसपास चल रहा है। सोना रखने पर कोई ब्याज नहीं मिलता, इसलिए लोग सोने के बजाय बॉन्ड में पैसा लगा रहे हैं क्योंकि वहां निश्चित रिटर्न मिल रहा है।
  2. शेयर बाजार में AI का क्रेज: शेयर बाजार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को लेकर भारी उत्साह है, जिससे निवेशक ‘सुरक्षित संपत्तियों’ (जैसे सोने) से पैसा निकालकर शेयरों में लगा रहे हैं।
  3. मजबूत डॉलर (USD): अमेरिकी डॉलर मजबूत हो रहा है, जिससे उन देशों के निवेशकों के लिए सोना खरीदना महंगा हो गया है जो डॉलर का इस्तेमाल नहीं करते (जैसे भारत)।

सोने की लॉन्ग-टर्म कहानी अभी भी मजबूत है?

भले ही शॉर्ट-टर्म में सोना गिर रहा है, लेकिन मध्य पूर्व का यह संकट सोने को लंबे समय में मजबूत करने वाले कई ढांचागत (Structural) कारणों को दोबारा याद दिलाता है:

  • डी-डॉलराइजेशन (De-dollarisation): दुनिया भर में डॉलर पर निर्भरता कम करने का चलन तेज हो रहा है।
  • बॉन्ड्स पर घटता भरोसा: अब निवेशक सरकारी बॉन्ड को पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने का एक भरोसेमंद जरिया नहीं मान रहे हैं।
  • बढ़ता वैश्विक कर्ज: दुनिया भर की सरकारों पर बढ़ता हुआ कर्ज रियल एसेट्स (जैसे सोना-चांदी) की मांग को बढ़ाएगा।

शॉर्ट-टर्म बनाम लॉन्ग-टर्म

कुल मिलाकर, किसी बड़े सकारात्मक ट्रिगर के बिना शॉर्ट-टर्म में चांदी की कीमत एक दायरे में स्थिर रह सकती है। लेकिन लंबी अवधि (Long Term) में, बाजार में 41 मिलियन औंस (+41moz) का बड़ा घाटा (Sustained Market Deficit) यानी मांग के मुकाबले सप्लाई की कमी रहने वाली है। यह कमी और चांदी की बढ़ती औद्योगिक मांग (जैसे सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स में) भविष्य में इसकी कीमत को ऊपर ले जाने का काम करेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल, FAQ’s

1. ANZ ने सोने का प्राइस टारगेट क्यों घटाया है?
ANZ ने मजबूत अमेरिकी डॉलर, ऊंची बॉन्ड यील्ड, भू-राजनीतिक तनाव और हालिया कीमतों में कमजोरी को देखते हुए साल के अंत का गोल्ड प्राइस टारगेट 5,600 डॉलर से घटाकर 5,200 डॉलर प्रति औंस कर दिया है।

2. ANZ के अनुसार सोने पर शॉर्ट-टर्म में दबाव क्यों बना रह सकता है?
बढ़ती महंगाई, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और शेयर बाजार में AI सेक्टर को लेकर बढ़ते उत्साह के कारण निवेशकों का रुझान सोने से हटकर अन्य परिसंपत्तियों की ओर जा सकता है।

3. मध्य पूर्व तनाव के बावजूद सोने की कीमतों में तेजी क्यों नहीं आ रही है?
ANZ के अनुसार ऊंची बॉन्ड यील्ड, मजबूत अमेरिकी डॉलर और AI आधारित शेयरों में निवेशकों की बढ़ती रुचि ने सोने की सुरक्षित निवेश वाली मांग को कमजोर कर दिया है, जिससे कीमतों को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा।

4. ANZ को सोने के लॉन्ग-टर्म आउटलुक पर भरोसा क्यों है?
बैंक का मानना है कि डी-डॉलराइजेशन की प्रक्रिया, बढ़ता वैश्विक कर्ज, सरकारी बॉन्ड पर घटता भरोसा और फेडरल रिजर्व की संभावित ब्याज दर कटौती जैसे कारक भविष्य में सोने की मांग को समर्थन देंगे।

5. चांदी को लेकर ANZ का क्या दृष्टिकोण है?
ANZ का मानना है कि निकट अवधि में चांदी की कीमतें सीमित दायरे में रह सकती हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर सप्लाई की कमी और सोलर पैनल व इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों से बढ़ती औद्योगिक मांग लंबी अवधि में चांदी की कीमतों को समर्थन दे सकती है।

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डिस्क्लेमर: ये न्यूज सिर्फ जानकारी के लिए बनाई गई है, निवेश या ट्रेडिंग की सलाह नहीं है। स्टोरी में दी गई राय एक्सपर्ट और ब्रोकरेज हाउस की है। गोल्ड प्राइस टुडे से जुड़े लोग निजी तौर पर सोने, चांदी की ट्रेडिंग नहीं करते हैं। हमारी सोने, चांदी में कोई पोजीशन नहीं है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें। सोने चांदी में निवेश जोखिम का काम है अपने विवेक का इस्तेमाल करें। आपको होने वाले किसी भी नुकसान की हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है।

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