Standard Chartered: वैश्विक आर्थिक दबावों और बढ़ते बाजार उतार-चढ़ाव के बीच कीमती धातुओं के बाजार से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड (Standard Chartered) बैंक की ग्लोबल हेड ऑफ कमोडिटीज रिसर्च, सुकी कूपर ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में सोने की बिकवाली (selloff) और अधिक तेज हो सकती है। इसका मुख्य कारण यह है कि निवेशक गोल्ड-बैक्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (Gold ETFs) में घाटे वाली पोजीशन को बेचकर (liquidate) बाहर निकल सकते हैं, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव और गहराने की आशंका है।
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वैश्विक आर्थिक दबाव (मैक्रो हेडविंड्स) और रियल यील्ड्स का असर
सोने के बाजार की मौजूदा स्थिति पर बात करते हुए सुकी कूपर ने कहा:
“हम उम्मीद करते हैं कि मैक्रो हेडविड्स (वैश्विक आर्थिक दबावों) के कारण आने वाले समय में सोने की कीमतें और अधिक संवेदनशील (vulnerable) हो सकती हैं। सोने की कीमतों ने एक बार फिर रियल यील्ड्स (वास्तविक रिटर्न) से संकेत लेना शुरू कर दिया है।”
कूपर ने इसके पीछे के कारणों को समझाते हुए बताया कि पारंपरिक रूप से ईटीएफ (ETF) बाजारों में निवेश की मांग का संबंध फिजिकल मार्केट के अन्य ढांचागत कारकों की तुलना में रियल यील्ड्स से अधिक होता है। बढ़ती मुद्रास्फीति (महंगाई) के कारण अब बाजार इस बात की उम्मीद लगा रहा है कि फेडरल रिजर्व साल के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। बाजार की ये उम्मीदें रियल यील्ड्स को ऊपर ले जा रही हैं, जिससे सोने जैसी बिना ब्याज या रिटर्न देने वाली संपत्ति (non-yielding asset) को रखने की अवसर लागत (opportunity cost) बढ़ जाती है।
उन्होंने डेटा साझा करते हुए आगे कहा:
“मई में टैक्टिकल पोजीशनिंग सकारात्मक रही थी, लेकिन ईटीपी (ETP) होल्डिंग्स में गिरावट आई (-16 टन) और जून में भी यह गिरावट जारी रही।”
इन महत्वपूर्ण टेक्निकल प्राइस लेवल्स पर रखें नजर
कूपर के एनालिसिस के अनुसार, निवेशकों को आने वाले समय में सोने के कुछ खास तकनीकी स्तरों पर नजर रखने की सख्त जरूरत है:
- 4,250 डॉलर प्रति औंस (ounce): निवेशकों को सबसे पहले इसी तकनीकी मूल्य स्तर पर नजर रखनी होगी। कूपर के मुताबिक, गोल्ड ईटीपी फ्लो के विश्लेषण से पता चलता है कि हाल ही में 4,250 डॉलर/oz के निचले स्तर पर कम से कम 270 टन की होल्डिंग्स घाटे (loss-making territory) में हैं। यदि हम मान लें कि इस साल की शुद्ध निकासी (net redemptions) मुनाफे वाली थी और FIFO (फर्स्ट-इन, फर्स्ट-आउट) के आधार पर कम कीमत के स्तर पर स्थापित थी, तो यह आंकड़ा बढ़कर 465 टन हो जाता है।
- 4,100 डॉलर प्रति औंस (ounce): शॉर्ट-टर्म (near term) में ईटीपी होल्डिंग्स काफी कमजोर हैं और इससे सोने की कीमतों में और गिरावट का जोखिम बढ़ सकता है, जिसका अगला टेक्निकल सपोर्ट लेवल 4,100 डॉलर/oz के आसपास है।
- 4,000 डॉलर प्रति औंस (ounce): उन्होंने आगे चेतावनी दी कि अगर कीमतें गिरकर 4,000 डॉलर/oz तक आती हैं, तो घाटे वाली पोजीशन बढ़कर 298 टन हो जाएगी।
पैनिक सेलिंग का खतरा और रिकवरी की उम्मीद
संक्षेप में, कूपर यह चेतावनी दे रही हैं कि जैसे-जैसे सोने की कीमत इन स्तरों (4,250 डॉलर -> 4,100 डॉलर -> 4,000 डॉलर) से नीचे जाएगी, वैसे-वैसे निवेशकों का घाटा बढ़ता जाएगा। इस घाटे से बचने के लिए निवेशक घबराहट (Panic) में अपना सोना और ज्यादा बेच सकते हैं, जिससे कीमतें और तेजी से नीचे गिर सकती हैं।
कूपर ने अंत में यह भी जोड़ा कि अमेरिकी डॉलर (U.S. Dollar) में फिर से आ रही मजबूती भी सोने के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही है; हालांकि, इसके बावजूद वह अभी भी आशावादी हैं कि मध्यम अवधि (medium term) में सोने की कीमतें फिर से वापसी (recover) कर सकती हैं।
सोने, चांदी के भाव से जुड़े सवाल जवाब, Gold Silver Price FAQ
1. स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने सोने को लेकर क्या चेतावनी दी है?
स्टैंडर्ड चार्टर्ड की ग्लोबल हेड ऑफ कमोडिटीज रिसर्च सुकी कूपर ने कहा है कि गोल्ड ETF में बढ़ती बिकवाली के कारण आने वाले समय में सोने की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
2. गोल्ड ETF की बिकवाली से सोने की कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि निवेशक घाटे वाली ETF होल्डिंग्स को बेचकर बाहर निकलते हैं, तो बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है, जिससे सोने की कीमतें और नीचे जा सकती हैं।
3. रियल यील्ड्स बढ़ने से सोने पर दबाव क्यों बढ़ता है?
सोना कोई ब्याज या नियमित रिटर्न नहीं देता। जब रियल यील्ड्स बढ़ती हैं, तो निवेशक अधिक रिटर्न देने वाली परिसंपत्तियों की ओर आकर्षित होते हैं, जिससे सोने की मांग कमजोर पड़ सकती है।
4. निवेशकों को किन प्रमुख तकनीकी स्तरों पर नजर रखनी चाहिए?
सुकी कूपर के अनुसार 4,250 डॉलर, 4,100 डॉलर और 4,000 डॉलर प्रति औंस ऐसे महत्वपूर्ण स्तर हैं, जहां से सोने में अतिरिक्त बिकवाली और अस्थिरता देखने को मिल सकती है।
5. क्या सोने में लंबी अवधि के लिए उम्मीद बनी हुई है?
हाँ। अल्पकालिक दबाव और संभावित गिरावट की आशंका के बावजूद, सुकी कूपर का मानना है कि मध्यम अवधि में सोना दोबारा रिकवरी कर सकता है और कीमतों में सुधार देखने को मिल सकता है।
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डिस्क्लेमर: ये न्यूज सिर्फ जानकारी के लिए बनाई गई है, निवेश या ट्रेडिंग की सलाह नहीं है। स्टोरी में दी गई राय एक्सपर्ट और ब्रोकरेज हाउस की है। गोल्ड प्राइस टुडे से जुड़े लोग निजी तौर पर सोने, चांदी की ट्रेडिंग नहीं करते हैं। हमारी सोने, चांदी में कोई पोजीशन नहीं है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें। सोने चांदी में निवेश जोखिम का काम है अपने विवेक का इस्तेमाल करें। आपको होने वाले किसी भी नुकसान की हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है।



