Friday, June 5, 2026
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WGC Report: कभी सोना न खरीदने वाले देश भी खरीद रहे गोल्ड, जानिए आखिर क्या है वजह?

WGC Report: वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy) में इस समय एक ऐसी हलचल चल रही है जिसने बड़े-बड़े आर्थिक जानकारों को हैरान कर दिया है। “कभी सोना ना खरीदने वाले देश भी अब सोना खरीद रहे हैं।” जी हां, वल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) द्वारा द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2026 की पहली तिमाही (Q1 2026) के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों (Central Banks) ने इस तिमाही में नेट 244 टन सोना खरीदा है, जो पिछले एक साल से भी अधिक समय में सबसे तेज़ रफ़्तार है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस रेस में अब वे देश भी शामिल हो गए हैं जिन्होंने इतिहास में या तो कभी सोना नहीं खरीदा था, या फिर दशकों से इस बाजार से दूरी बनाए हुए थे।

एक नई और चौंकाने वाली लिस्ट

जब हम केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीदारी की बात करते हैं, तो दिमाग में चीन, पोलैंड या बड़े उभरते बाजारों (Emerging Markets) का नाम आता है। साल 2022 से इनकी खरीदारी अंतरराष्ट्रीय फाइनेंस की सबसे बड़ी खबर बनी हुई है। लेकिन इस पुरानी लिस्ट के समानांतर एक दूसरी लिस्ट भी चुपचाप तैयार हो रही है, जो और भी हैरान करने वाली कहानी बयां करती है।

इस नई लिस्ट में शामिल हैं:

  • ग्वाटेमाला
  • इंडोनेशिया
  • मलेशिया
  • कंबोडिया
  • युगांडा
  • केन्या

ये ऐसे देश हैं जिनका नाम आमतौर पर कीमती धातुओं (Precious Metals) के मार्केट बुलेटिन में नहीं देखा जाता था। इनमें से कुछ देश अपने इतिहास में पहली बार सोना खरीद रहे हैं, तो कुछ दशकों बाद इस बाजार में लौटे हैं।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) ने कही ये बात

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) द्वारा 29 अप्रैल को जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंकों ने केवल इस साल की पहली तिमाही (Q1 2026) में ही 244 टन सोना खरीदा। यह पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 3% ज्यादा है। इसके साथ ही लगातार 17 महीनों से केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की नेट खरीदारी जारी है।

WGC के सेंट्रल बैंक हेड, शाओकाई फैन (Shaokai Fan) ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा:

“पिछले कुछ महीनों में हम एक अनोखी घटना (Phenomenon) देख रहे हैं। नए केंद्रीय बैंक, या ऐसे बैंक जो लंबे समय से सोने के बाजार में निष्क्रिय या गायब थे, अब तेजी से बाजार में उतर रहे हैं।”

एक केंद्रीय बैंकर के मुंह से ‘अनोखी घटना’ जैसे शब्द का निकलना यह साबित करता है कि वैश्विक बाजार में कुछ बहुत बड़ा बदल रहा है।

Q1 2026 में किसने कितना सोना खरीदा?

  • पोलैंड – 31 टन सोने की खरीदारी

मुख्य वजह / योजना: कुल 700 टन सोना जुटाने के बहु-वर्षीय प्लान का हिस्सा

  • उज्बेकिस्तान – 25 टन सोने की खरीदारी

मुख्य वजह / योजना: अपने वैश्विक भंडार को मजबूत करना

  • कजाकिस्तान – 12 टन सोने की खरीदारी

मुख्य वजह / योजना: स्वर्ण भंडार में लगातार बढ़ोतरी

इन पुराने और बड़े खरीदारों के साथ-साथ चेक गणराज्य, मलेशिया, सर्बिया, ग्वाटेमाला, कंबोडिया और इंडोनेशिया जैसे देश भी खड़े थे। इसके अलावा, बैंक ऑफ युगांडा ने अपने घरेलू स्वर्ण कार्यक्रम (Domestic Gold Programme) के तहत सक्रिय रूप से सोना खरीदना शुरू कर दिया है, और केन्या के केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने भी ऐसे ही संकेत दिए हैं।

रिकॉर्ड तोड़ कीमतों के बावजूद क्यों मची है ‘गोल्ड’ खरीदने की होड़?

एक सामान्य बाजार का नियम है कि जब कीमतें बढ़ती हैं, तो खरीदारी धीमी हो जाती है। लेकिन सोने के मामले में यह नियम टूट चुका है।

  • ऐतिहासिक महंगाई: जनवरी 2026 में सोने की कीमत इतिहास के सबसे ऊंचे स्तर (Nominal Spot Price) यानी करीब 5,600 डॉलर प्रति औंस (Intraday Peak) तक पहुंच गई थी।
  • दोगुनी रफ्तार: इतनी भारी कीमत के बावजूद केंद्रीय बैंकों की रफ्तार धीमी नहीं हुई। आज केंद्रीय बैंकों की औसत तिमाही खरीदारी, 2022 से पहले के औसत के मुकाबले दोगुनी हो चुकी है।

यह कोई अस्थाई ट्रेंड (Momentum Trading) नहीं है, बल्कि एक ढांचागत बदलाव (Structural Repositioning) है। जब बात अगले 10 से 30 सालों की हो, तो केंद्रीय बैंकों के लिए सोने की कीमत से ज्यादा यह मायने रखता है कि उनका बाकी खजाना जिस करेंसी (जैसे डॉलर या यूरो) में रखा है, उसकी वैल्यू बचेगी या नहीं।

WGC के सर्वे के मुताबिक, रिकॉर्ड 43% बैंकों ने अपने खुद के सोने के भंडार को बढ़ाने की योजना बनाई है, जबकि इसे घटाने की बात किसी भी बैंक ने नहीं सोची।

आखिर क्यों सोना ही है केंद्रीय बैंकों की पहली पसंद?

यह कोई भेड़चाल नहीं है। हर देश का केंद्रीय बैंक अपने रिजर्व (खजाने) को संभालने के लिए अपने हिसाब से गणित लगा रहा है और सबका जवाब एक ही आ रहा है। दुनिया के केंद्रीय बैंक अब एक ऐसी संपत्ति (Asset) को चुन रहे हैं:

  1. जिसे कोई भी केंद्रीय बैंक प्रिंट (छाप) नहीं सकता
  2. जिसे कोई भी सरकार नियंत्रित नहीं कर सकती
  3. और सबसे जरूरी- जिस पर कोई भी प्रतिबंध (Sanctions) इसे फ्रीज नहीं कर सकता

आज दुनिया के हर केंद्रीय बैंक के सामने एक गंभीर सवाल है: “हमारे खजाने का कितना हिस्सा ऐसी संपत्तियों (जैसे अमेरिकी डॉलर या बॉन्ड्स) में है, जिस पर नियंत्रण किसी और का है?”

सोना इस डर और सवाल के दायरे से बिल्कुल बाहर है। न्यूयॉर्क या लंदन का कोई भी मध्यस्थ बैंक (Correspondent Bank) आपके और आपके सोने के बीच नहीं आ सकता। इसे सुरक्षित रखने या इस तक पहुँचने के लिए किसी दूसरी सरकार की इजाजत की जरूरत नहीं होती। यही वजह है कि आज वे देश भी सोना खरीद रहे हैं, जिन्होंने पहले कभी सोने की तरफ रुख नहीं किया था।

अक्सर पूछे जाने वाला सवाल, FAQ’s

1. 2026 की पहली तिमाही में केंद्रीय बैंकों ने कितनी मात्रा में सोना खरीदा और इसका क्या महत्व है?
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के अनुसार, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने Q1 2026 में कुल 244 टन सोने की नेट खरीदारी की। यह पिछले एक साल से अधिक समय की सबसे तेज खरीदारी मानी जा रही है और यह दर्शाती है कि वैश्विक स्तर पर सोने को सुरक्षित रिजर्व संपत्ति के रूप में प्राथमिकता दी जा रही है।

2. किन नए देशों ने हाल के वर्षों में सोना खरीदना शुरू किया है?
ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, मलेशिया, कंबोडिया, युगांडा और केन्या जैसे देशों ने हाल के समय में सोने की खरीदारी बढ़ाई है। इनमें से कुछ देश पहली बार अपने स्वर्ण भंडार को बढ़ा रहे हैं, जबकि कुछ देश लंबे अंतराल के बाद दोबारा सोने के बाजार में लौटे हैं।

3. सोने की रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के बावजूद केंद्रीय बैंक इसकी खरीदारी क्यों बढ़ा रहे हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक अल्पकालिक कीमतों के बजाय दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा पर ध्यान दे रहे हैं। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, मुद्रास्फीति, भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता कम करने की रणनीति के चलते सोने की मांग लगातार बढ़ रही है।

4. 2026 की पहली तिमाही में सबसे अधिक सोना खरीदने वाले देश कौन रहे?
Q1 2026 में पोलैंड ने 31 टन, उज्बेकिस्तान ने 25 टन और कजाकिस्तान ने 12 टन सोने की खरीदारी की। इसके अलावा चेक गणराज्य, सर्बिया, मलेशिया, ग्वाटेमाला और इंडोनेशिया जैसे देशों ने भी अपने स्वर्ण भंडार में उल्लेखनीय वृद्धि की है।

5. केंद्रीय बैंकों के लिए सोना अन्य रिजर्व संपत्तियों की तुलना में अधिक आकर्षक क्यों माना जाता है?
सोना एक ऐसी वैश्विक संपत्ति है जिसे कोई भी देश या केंद्रीय बैंक प्रिंट नहीं कर सकता। यह किसी एक सरकार या वित्तीय प्रणाली के नियंत्रण में नहीं होता और प्रतिबंधों या भू-राजनीतिक तनावों से अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है। यही कारण है कि कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।

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