Friday, June 5, 2026
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MCX Good Delivery Norms: घरेलू रिफाइनर्स की भागीदारी बढ़ाने के लिए MCX ने BIS-स्टैंडर्ड गोल्ड और सिल्वर के लिए Good Delivery Norms में किया संशोधन

MCX Good Delivery Norms: घरेलू रिफाइनर्स की भागीदारी बढ़ाने के लिए MCX ने BIS-स्टैंडर्ड गोल्ड और सिल्वर के लिए Good Delivery Norms में किया संशोधनभारत के कीमती धातु (Precious Metals) बाजार को एक बड़ा ढांचागत बढ़ावा मिलने जा रहा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (MCX) ने BIS-स्टैंडर्ड सोने और चांदी के लिए अपने गुड डिलीवरी नियमों (Good Delivery Norms) में बदलाव किया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य देश के चांदी रिफाइनर्स (सिल्वर रिफाइन करने वाली कंपनियों) को बाजार में भाग लेने के लिए बढ़ावा देना है। इसके साथ ही MCX प्लेटफॉर्म पर डिलीवरी की प्रक्रिया को बेहतर बनाना और सराफा (बुलियन) बाजार में पारदर्शिता, नकदी (लिक्विडिटी) और मानकीकरण (स्टैंडर्डाइजेशन) को मजबूत करना है।

इस नए बदलाव से भारत के कीमती धातु बाजार को आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी। इससे योग्य घरेलू चांदी रिफाइनर्स के लिए एक्सचेंज के जरिए डिलीवरी देना और आसान हो जाएगा। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस कदम से संगठित बुलियन व्यापार में लोगों का भरोसा और काम करने का तरीका काफी बेहतर होगा।

MCX पर गुड डिलीवरी फ्रेमवर्क की शुरुआत और विकास

घरेलू कीमती धातुओं की डिलीवरी से जुड़े नियम समय-समय पर एक्सचेंज द्वारा सुधारे जाते रहे हैं। एक्सचेंज के नियमों और कानूनों के तहत, MCX ने सबसे पहले 11 अप्रैल 2022 को एक सर्कुलर (No. MCX/PMT/216/2022) जारी करके BIS-स्टैंडर्ड सोने और चांदी के लिए ‘गुड डिलीवरी नियम’ शुरू किए थे।

2022 की उस शुरुआत ने प्लेटफॉर्म पर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के नियमों के अनुसार धातुओं को लाने का एक बेंचमार्क तय किया था। वहीं, अब साल 2026 में किए गए ये नए बदलाव पुराने नियमों को स्थानीय चांदी रिफाइनिंग यूनिट्स के हिसाब से और बेहतर बनाने के लिए किए गए हैं।

घरेलू चांदी रिफाइनर्स की भागीदारी पर विशेष ध्यान

इन नए नियमों का सबसे बड़ा मकसद संगठित कमोडिटी ट्रेडिंग में भारतीय चांदी रिफाइनर्स की भागीदारी को बढ़ाना है। पैनल में शामिल होने (Empanelment) की प्रक्रिया को सरल और बेहतर बनाकर, MCX घरेलू कंपनियों के लिए इस सिस्टम से जुड़ना और आसान बनाना चाहता है।

एक्सचेंज के अनुसार, घरेलू चांदी रिफाइनर्स के जुड़ने से सप्लाई चेन मजबूत होगी और भारत में बुलियन मार्केट का इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर होगा।

इस बदलाव से इन चीजों में भी सुधार होने की उम्मीद है:

  • चांदी के व्यापार में बाजार की नकदी (Liquidity) बढ़ेगी।
  • बुलियन (सोने-चांदी) की क्वालिटी का मानकीकरण (Standardisation) होगा।
  • एक्सचेंज डिलीवरी की प्रक्रिया में पारदर्शिता (Transparency) आएगी।
  • घरेलू कीमती धातुओं के व्यापार की कार्यकुशलता बढ़ेगी।

बाजार के प्रतिभागियों के लिए आधिकारिक आमंत्रण

अपने सदस्यों को औपचारिक नोटिस जारी करने के बाद, MCX ने अब सभी योग्य घरेलू चांदी रिफाइनर्स को इन नए नियमों के तहत आवेदन करने के लिए आमंत्रित किया है। वित्तीय योग्यता (Financial Net Worth), रिफाइनरी की तकनीकी क्षमता और क्वालिटी टेस्टिंग के तरीकों से जुड़ी सभी बारीकियां नए दिशानिर्देशों के एनेक्सचर-1 (Annexure-I) में दी गई हैं।

बाजार विश्लेषक इस कदम को कमोडिटी सेक्टर में ‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) पहल के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देख रहे हैं। मुख्य क्लीयरिंग सिस्टम में अधिक घरेलू रिफाइनर्स के शामिल होने से, आने वाले समय में एक्सचेंज सेटलमेंट के लिए विदेशी चांदी की ईंटों (Imported Silver Bars) पर निर्भरता कम होगी। इससे स्थानीय व्यापारियों को एक पारदर्शी और विश्वसनीय प्राइसिंग प्लेटफॉर्म मिल सकेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल, FAQs

1. MCX ने Good Delivery Norms में क्या बदलाव किए हैं?
MCX ने BIS-स्टैंडर्ड गोल्ड और सिल्वर के लिए अपने Good Delivery Norms में संशोधन किया है। नए नियमों में घरेलू सिल्वर रिफाइनर्स के लिए Eligibility Criteria और Empanelment Process को आसान और अधिक व्यवस्थित बनाया गया है, ताकि वे एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर आसानी से भाग ले सकें।

2. इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इन संशोधित नियमों का मुख्य उद्देश्य घरेलू सिल्वर रिफाइनर्स की भागीदारी बढ़ाना, बुलियन बाजार में पारदर्शिता लाना, डिलीवरी सिस्टम को मजबूत करना और भारत के Precious Metals Market को अधिक आधुनिक एवं संगठित बनाना है।

3. घरेलू सिल्वर रिफाइनर्स को इससे क्या फायदा होगा?
नए नियमों के तहत घरेलू सिल्वर रिफाइनर्स के लिए MCX प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण और डिलीवरी प्रक्रिया आसान होगी। इससे उन्हें संगठित बाजार तक पहुंच, बेहतर प्राइसिंग प्लेटफॉर्म और एक्सचेंज आधारित ट्रेडिंग सिस्टम का लाभ मिलेगा।

4. क्या इस बदलाव से बुलियन बाजार पर असर पड़ेगा?
हाँ, इस बदलाव से बुलियन बाजार में Liquidity बढ़ने, सोना-चांदी की क्वालिटी के Standardisation, डिलीवरी में Transparency और सप्लाई चेन की कार्यकुशलता बेहतर होने की उम्मीद है। इससे संगठित बुलियन व्यापार को मजबूती मिलेगी।

5. Make in India पहल से इसका क्या संबंध है?
विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम ‘Make in India’ पहल को मजबूत करेगा, क्योंकि इससे घरेलू रिफाइनर्स को एक्सचेंज सिस्टम में अधिक अवसर मिलेंगे और Imported Silver Bars पर निर्भरता धीरे-धीरे कम हो सकती है।

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