LBMA Report: ग्लोबल मार्केट में कीमती धातुओं ने इस साल की पहली तिमाही (Q1 2026) में वो कर दिखाया है जिसकी कल्पना विश्लेषकों ने भी नहीं की थी। LBMA की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अस्थिरता के बीच सोने ने न केवल 5,000 डॉलर का स्तर पार किया, बल्कि निवेशकों को भारी रिटर्न भी दिया। रिपोर्ट में LBMA के एनुअल प्राइस फोरकास्ट सर्वे की सबसे चौंकाने वाली बात चांदी का उतार-चढ़ाव और भविष्य में सोने के 7,000 डॉलर तक पहुंचने की भविष्यवाणी है।
5,500 डॉलर का ऐतिहासिक स्तर और भारी उतार-चढ़ाव
इस तिमाही में सोने की कीमतों में 29.04% का भारी उतार-चढ़ाव (Price Range) देखा गया, जो पिछली तिमाही के 16.09% के मुकाबले लगभग दोगुना है।
- ऐतिहासिक रिकॉर्ड: 26 जनवरी को पहली बार सोने ने 5,000 डॉलर का स्तर पार किया और 28 जनवरी को 5,501.70 डॉलर के ऑल-टाइम हाई (All-time high) को छुआ।
- तिमाही रिटर्न: गोल्ड ने तिमाही की शुरुआत 4,386.85 डॉलर से की थी और अंत 4,608.35 डॉलर पर हुआ, जो कुल 5.05% की शुद्ध बढ़त दर्शाता है।
- स्थिरता का नया मानक: रिकॉर्ड के अनुसार, 17 मार्च तक लगभग 70% सत्रों में सोना 5,000 डॉलर के ऊपर ही बना रहा।
कीमतों में उछाल के 3 बड़े कारण
बाजार में FOMO (छूट जाने का डर) पैदा करने वाली तीन प्रमुख घटनाएं रहीं:
- वेनेजुएला संकट (3 जनवरी): अमेरिका द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद सोना रातों-रात 3.15% उछलकर 4,456.40 डॉलर पर पहुंच गया।
- ईरान और ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (27 फरवरी): अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामनेई की मृत्यु के बाद तनाव चरम पर पहुंच गया। ईरान की 170 मिसाइल दागे जाने की खबर ने सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ा दी।
- महंगाई और कच्चा तेल: मार्च अंत तक कच्चा तेल (WTI) 101 डॉलर के पार चला गया। शेयर बाजारों में गिरावट के कारण निवेशकों ने नकदी की जरूरत पूरी करने के लिए सोने को ‘कैश मशीन’ की तरह इस्तेमाल किया (बिकवाली की), जिससे कीमतें अंत में 4,608 डॉलर पर स्थिर हुईं।
चांदी में बड़ी हलचल
चांदी ने इस तिमाही में सोने से भी अधिक जोखिम और अस्थिरता दिखाई है। 29 जनवरी को चांदी 118.45 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी, लेकिन 23 मार्च तक गिरकर 67.23 डॉलर पर आ गई। चांदी की प्राइस रेंज 76.19% रही, जिसे इतिहास में असाधारण माना जा रहा है। तिमाही के अंत में यह -2.06% के मामूली घाटे के साथ बंद हुई।
क्या सोना 7,000 और चांदी 160 डॉलर पहुंचेगी? (Gold Silver Price Outlook)
LBMA के एनुअल प्राइस फोरकास्ट सर्वे (Price Forecast Survey) ने बाजार में खलबली मचा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी अभी थमी नहीं है:
- सोना: विश्लेषकों ने इस साल गोल्ड के 6,000 से 7,000 डॉलर के स्तर को छूने की संभावना जताई है।
- चांदी: चांदी के 160 डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
- प्लैटिनम और पैलेडियम: प्लैटिनम 3,000 डॉलर के पार जा सकता है।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी बरकरार
कीमतों में रिकॉर्ड उछाल के बावजूद दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने सोना खरीदना नहीं छोड़ा है। फरवरी में 27 टन की शुद्ध खरीदारी हुई, जिसमें पोलैंड (+20 टन), उज्बेकिस्तान (+8 टन) और कजाकिस्तान (+8 टन) सबसे आगे रहे।
LBMA की यह रिपोर्ट वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक ऐतिहासिक मोड़ की ओर इशारा करती है। केंद्रीय बैंकों द्वारा जारी निरंतर खरीदारी और विश्लेषकों का सोने के 7,000 डॉलर तक पहुँचने का अनुमान यह स्पष्ट करता है कि आने वाले समय में सुरक्षित निवेश (Safe-haven assets) की मांग न केवल बनी रहेगी, बल्कि यह वैश्विक वित्तीय पोर्टफोलियो के केंद्र में रहेगी।
सोने, चांदी के भाव से जुड़े कुछ सवाल-जवाब, FAQ’s
1. LBMA रिपोर्ट में सोने के प्रदर्शन को कैसे बताया गया है?
LBMA रिपोर्ट के अनुसार Q1 2026 में सोने ने बेहद मजबूत प्रदर्शन किया और पहली बार 5,000 डॉलर का स्तर पार किया। इसके बाद यह 5,501.70 डॉलर के ऑल-टाइम हाई तक पहुंच गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक स्तर पर सोने की मांग काफी मजबूत रही।
2. इस तिमाही में सोने की कीमतों में इतनी बड़ी तेजी क्यों देखी गई?
सोने की कीमतों में तेजी का मुख्य कारण भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितता और महंगाई का बढ़ना रहा। इसके अलावा तेल की कीमतों में उछाल और शेयर बाजारों में गिरावट ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर आकर्षित किया।
3. चांदी का बाजार इस दौरान कैसा रहा?
चांदी में इस तिमाही के दौरान बेहद तेज उतार-चढ़ाव देखा गया। यह 118.45 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची लेकिन बाद में गिरकर 67.23 डॉलर पर आ गई। कुल मिलाकर चांदी ने लगभग 76% की प्राइस रेंज दिखाई और तिमाही को मामूली नुकसान के साथ समाप्त किया।
4. क्या सोना आगे और ऊपर जा सकता है? LBMA का क्या अनुमान है?
LBMA के प्राइस फोरकास्ट सर्वे के अनुसार, विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सोना आगे चलकर 6,000 डॉलर से 7,000 डॉलर तक पहुंच सकता है। यह अनुमान बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और मजबूत निवेश मांग को दर्शाता है।
5. केंद्रीय बैंक सोने की खरीदारी क्यों जारी रखे हुए हैं?
केंद्रीय बैंक लगातार सोना इसलिए खरीद रहे हैं क्योंकि यह आर्थिक अस्थिरता के समय एक सुरक्षित संपत्ति माना जाता है। फरवरी में भी 27 टन की शुद्ध खरीदारी देखी गई, जिसमें कई देशों ने अपने भंडार को मजबूत करने के लिए सक्रिय रूप से सोने में निवेश किया।
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डिस्क्लेमर: ये न्यूज सिर्फ जानकारी के लिए बनाई गई है, निवेश या ट्रेडिंग की सलाह नहीं है। स्टोरी में दी गई राय एक्सपर्ट और ब्रोकरेज हाउस की है। गोल्ड प्राइस टुडे से जुड़े लोग निजी तौर पर सोने, चांदी की ट्रेडिंग नहीं करते हैं। हमारी सोने, चांदी में कोई पोजीशन नहीं है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें। सोने चांदी में निवेश जोखिम का काम है अपने विवेक का इस्तेमाल करें। आपको होने वाले किसी भी नुकसान की हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है।



