BIS Hallmarking Expansion: भारत में सोने की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने हॉलमार्किंग व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। भारत सरकार ने 2026 के संशोधन अधिसूचना के माध्यम से देश के 7 और जिलों को सोने की अनिवार्य हॉलमार्किंग के दायरे में शामिल कर लिया है। इस फैसले का उद्देश्य उपभोक्ताओं को शुद्ध सोना उपलब्ध कराना और ज्वेलरी बाजार में पारदर्शिता बढ़ाना है।
BIS हॉलमार्किंग क्या है? (What Is BIS Gold Hallmarking?)
हॉलमार्किंग एक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से आभूषण, कलाकृतियों, बुलियन या सिक्कों में मौजूद कीमती धातु की शुद्धता (प्रोपोर्शन) का सही परीक्षण किया जाता है और उसे आधिकारिक रूप से दर्ज किया जाता है। सोने से बने उत्पादों के संदर्भ में इसे गोल्ड हॉलमार्किंग कहा जाता है।
भारत में हॉलमार्किंग का मानक Bureau of Indian Standards (BIS) द्वारा तय किया जाता है। वर्तमान में अनिवार्य हॉलमार्किंग का नियम केवल 14 कैरेट, 18 कैरेट और 22 कैरेट के सोने के आभूषणों और कलाकृतियों पर लागू है।
यदि कोई ज्वैलर हॉलमार्क वाले आभूषण बेचना चाहता है, तो उसे पहले BIS से पंजीकरण (Registration) प्राप्त करना होता है। इसके बाद पंजीकृत ज्वैलर अपने आभूषणों को हॉलमार्किंग के लिए BIS द्वारा मान्यता प्राप्त अस्सेइंग और हॉलमार्किंग (A&H) केंद्रों में भेजता है।
इन A&H केंद्रों में आभूषणों की शुद्धता का परीक्षण किया जाता है। यदि परीक्षण के बाद आभूषण निर्धारित मानकों पर खरा उतरता है, तो उस पर आधिकारिक हॉलमार्क लगा दिया जाता है, जो उसकी शुद्धता की पुष्टि करता है।
2026 में जोड़े गए ये 7 नए जिले (7 new districts added in 2026)
BIS ने अनिवार्य हॉलमार्किंग के दायरे में इन 7 नए जिलों को जोड़ा है।
- कटिहार (बिहार)
- नीमच (मध्य प्रदेश)
- बीड़ (महाराष्ट्र)
- रूपनगर (पंजाब)
- ब्यावर (राजस्थान)
- गोमती (त्रिपुरा)
- बांदा (उत्तर प्रदेश)
पहले थे 373 ज़िले (Earlier there were 373 Districts)
पहले BIS हॉलमार्किंग योजना के अंतर्गत देश में 373 जिलों को शामिल किया गया था। हालिया संशोधन अधिसूचना के बाद यह दायरा अब 373 से बढ़कर कुल 380 जिलों का हो गया है, जिससे अधिक क्षेत्रों में सोने की शुद्धता की निगरानी सुनिश्चित हो सकेगी।
BIS Hallmarking से जुड़े कुछ जरुरी सवाल-जवाब,FAQ’s
1. गोल्ड हॉलमार्किंग क्या होती है?
गोल्ड हॉलमार्किंग एक प्रमाणन प्रक्रिया है जिसमें आभूषण या सोने के उत्पाद की शुद्धता की जांच की जाती है। परीक्षण के बाद यदि सोना तय मानकों पर खरा उतरता है तो उस पर आधिकारिक हॉलमार्क लगाया जाता है, जो उसकी कैरेट और शुद्धता की गारंटी देता है।
2. भारत में गोल्ड हॉलमार्किंग का नियमन कौन करता है?
भारत में गोल्ड हॉलमार्किंग के मानक और नियम Bureau of Indian Standards (BIS) द्वारा तय किए जाते हैं। BIS ज्वैलर्स को पंजीकरण देता है और अधिकृत अस्सेइंग एवं हॉलमार्किंग केंद्रों के माध्यम से सोने की शुद्धता का परीक्षण करवाता है।
3. 2026 में किन नए जिलों को हॉलमार्किंग के दायरे में जोड़ा गया है?
सरकार ने 2026 में कटिहार (बिहार), नीमच (मध्य प्रदेश), बीड़ (महाराष्ट्र), रूपनगर (पंजाब), ब्यावर (राजस्थान), गोमती (त्रिपुरा) और बांदा (उत्तर प्रदेश) को अनिवार्य गोल्ड हॉलमार्किंग के दायरे में शामिल किया है।
4. हॉलमार्किंग किन कैरेट के सोने पर अनिवार्य है?
वर्तमान नियमों के अनुसार भारत में केवल 14 कैरेट, 18 कैरेट और 22 कैरेट के सोने के आभूषण और कलाकृतियों पर ही अनिवार्य हॉलमार्किंग लागू होती है।
5. हॉलमार्किंग विस्तार से उपभोक्ताओं और ज्वैलर्स को क्या फायदा होगा?
हॉलमार्किंग के दायरे के विस्तार से उपभोक्ताओं को शुद्ध और प्रमाणित सोना मिलेगा, जबकि ज्वैलरी बाजार में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ेगा। इससे नकली या कम शुद्धता वाले सोने की बिक्री पर भी प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है।
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